SIT विवाद के बीच Pawan Khera ने CEC से इस्तीफे की मांग की
उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग के भीतर से आवाज़ें आ रही हैं। सरकार के भीतर से भी आवाज़ें उठ रही हैं। अगर मोदी जी और शाह इसे अभी नहीं सुन पा रहे हैं, तो इसमें हमारी क्या गलती है? उन्हें अपने कान चेक करवाने चाहिए।"

कांग्रेस नेता Pawan Khera ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIT जांच की मांग वाली याचिका पर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि CEC को इस्तीफा दे देना चाहिए और आरोप लगाया कि “चुनाव आयोग के भीतर से ही आवाजें उठ रही हैं”।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) विवाद के बीच CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए Pawan Khera ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनके अपने हित में होगा।
Pawan Khera ने पत्रकारों से कहा, “उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। उनकी सुरक्षा, उनके हित और उनके भविष्य की सुरक्षा इसी में है। जब मैं सुरक्षा की बात करता हूं, तो मेरा मतलब उनके भविष्य की सुरक्षा से है, क्योंकि अगर वह अप्रूवर (सरकारी गवाह) बन जाते हैं तो वह सुरक्षित रहेंगे।
वरना, उनका आने वाला समय जेल में कटेगा।” यह टिप्पणी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद आई है। इस याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
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फॉर्म 6 और ECINet डेटा पर सवाल
इन फैसलों में ‘फॉर्म 6’ में बदलाव, “ECINet के जरिए वोटर लिस्ट के डेटा का सेंट्रलाइज़ेशन” और ऐसे कदम शामिल हैं जिनसे कथित तौर पर योग्य वोटर लिस्ट से बाहर हो गए।
याचिका में सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, DG-IT सीमा खन्ना और अन्य अधिकारियों का भी नाम है और उन पर अपनी सरकारी ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने 23 सितंबर को छपी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच वोटर लिस्ट और डेटाबेस एक्सेस से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ECINet पोर्टल पर ‘फॉर्म 6’ में बदलाव करके पहली बार वोट देने वालों के लिए “पिछली SIR” जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया था।
साथ ही, यह भी दावा किया गया कि यह कदम ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में औपचारिक संशोधन किए बिना उठाया गया था। याचिका में वोटर लिस्ट सिस्टम तक डिसेंट्रलाइज़्ड एक्सेस (विकेंद्रीकृत पहुंच) को बहाल करने और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच या SIT (विशेष जांच दल) के गठन की भी मांग की गई है।
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने विपक्ष की आलोचना के बीच CEC का समर्थन करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने और वोटर लिस्ट को ठीक करने के लिए ज्ञानेश कुमार को “कम से कम पद्म भूषण” तो मिलना ही चाहिए। इस पर Pawan Khera ने बीजेपी नेता पर तंज कसा।
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Pawan Khera का Gyanesh Kumar पर तंज
Pawan Khera ने कहा, “पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज़ है। उन्हें प्रधानमंत्री बना दीजिए। भाई, जो आदमी दूसरों को प्रधानमंत्री बना सकता है, उसे ही प्रधानमंत्री बना दीजिए। आप इतनी छोटी चीज़ क्यों दे रहे हैं, भाई? ज्ञानेश बाबू, ज्ञानेश गुप्ता जी को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए।”
चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के इस बयान पर कि चुनाव आयोग को अपना पक्ष मज़बूती से रखना चाहिए, खेड़ा ने कहा कि चिंताएं सिस्टम के भीतर से ही उठ रही हैं।
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग के भीतर से आवाज़ें आ रही हैं। सरकार के भीतर से भी आवाज़ें उठ रही हैं। अगर मोदी जी और शाह इसे अभी नहीं सुन पा रहे हैं, तो इसमें हमारी क्या गलती है? उन्हें अपने कान चेक करवाने चाहिए।”
NDA गठबंधन की कुछ पार्टियों के यह कहने पर कि बीजेपी को जवाब देना चाहिए, Pawan Khera ने कहा, “अब बहुत से लोग बोलेंगे। बीजेपी के भीतर से भी आवाज़ें उठेंगी। इंतज़ार कीजिए।”
मीडिया रिपोर्ट के बाद, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (UBT) और वामपंथी दलों सहित विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर हमले तेज़ कर दिए हैं। उन्होंने चुनाव में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है और जवाबदेही की मांग की है।
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SIR को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई राज्यों में चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया को संभालने के तरीके के खिलाफ प्रदर्शन किए।
असम में, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुवाहाटी के राजीव भवन से एक विरोध रैली निकाली। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों व लिए गए फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की गई।
पार्टी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान APCC अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए “बर्बर कार्रवाई” करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि देश भर में कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये चुनावी हार से ध्यान भटकाने की कोशिशें हैं।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक तकनीकी नोट, लिखित सवाल और सुझाव कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं।
ECI ने जोर देकर कहा कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन पर तीनों आयुक्तों की मंजूरी थी।
उम्मीद है कि यह मुद्दा 29 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उठेगा।
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