P. Chidambaram ने SIR को वापस लेने और SSR को स्थानांतरित करने को लेकर ECI पर निशाना साधा

कांग्रेस नेता ने अलग-अलग राज्यों में इस अभियान को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटाए गए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री P. Chidambaram ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को संभालने के तरीके को लेकर आयोग की आलोचना की, लाखों नाम व्यवस्थित तरीके से हटाए जाने पर सवाल उठाए और जवाबदेही की मांग की।

‘X’ पर एक पोस्ट में, P. Chidambaram ने दावा किया कि विवादित SIR प्रक्रिया को बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केवल बढ़ते विरोध और अदालती हस्तक्षेप के बाद ही रोका गया।

17 राज्यों में अब सिर्फ SSR होगा, बोले P. Chidambaram

P. Chidambaram ने लिखा, “विरोध-प्रदर्शनों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद, ECI और श्री ज्ञानेश कुमार को अक्ल आ गई है। 17 बचे हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया को रोक दिया गया है, और अब वहां केवल सामान्य SSR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) होगा। नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश करने की जरूरत नहीं है।”

कांग्रेस नेता ने अलग-अलग राज्यों में इस अभियान को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटाए गए।

P. Chidambaram ने कहा, “S.I.R. के तहत 20 राज्यों के साथ भेदभाव क्यों किया गया और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना 13,30,00,000 नाम (जिनमें मृत लोगों के नाम भी शामिल हैं) क्यों हटा दिए गए? करोड़ों नाम अवैध रूप से हटाने के बाद, अब ECI ने ‘छूट गए’ मतदाताओं को शामिल करने के लिए एक और कवायद शुरू की है!”

इस प्रक्रिया के लिए वित्तीय और संस्थागत जवाबदेही की मांग करते हुए, P. Chidambaram ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा और कहा कि इस खराब तरीके से लागू किए गए अभियान में जनता के पैसे बर्बाद हुए।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “दोहरे खर्च के लिए श्री ज्ञानेश कुमार से वसूली (सरचार्ज) की जानी चाहिए।”गुरुवार को, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मतदाता सूचियों का ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (SSR) करने का निर्देश दिया है, जिसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि (क्वालिफाइंग डेट) तय किया गया है।

यह प्रक्रिया ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 21 के तहत शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को शामिल करना है।

Sanjay Raut ने सुप्रीम कोर्ट में Rahul Gandhi के कदम का समर्थन किया, कहा – न्याय की जीत होगी

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाद में शुरू होगी प्रक्रिया

इस चरण में शामिल 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल।

पत्र में बताया गया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है – जैसे कि आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली – उनके लिए कार्यक्रम की घोषणा अलग से की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जहाँ यह प्रक्रिया अभी शुरू होनी है, वहाँ के लिए भी कार्यक्रम की सूचना बाद में दी जाएगी, जिसमें स्थानीय मौसम की स्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।

समय-सारणी के अनुसार, 2 नवंबर तक मतदान केंद्रों को तर्कसंगत (rationalise) बनाया जाएगा। मतदाता सूची का मसौदा 12 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इन दावों और आपत्तियों पर 28 दिसंबर तक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी, और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी, 2027 को जारी होने की उम्मीद है।

अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

Related Articles

Back to top button