CM Fadnavis बोले, मौजूदा SIR पुरानी प्रक्रिया का अगला चरण है

CM Fadnavis ने कहा, "भारत की चुनावी व्यवस्था में वोटर लिस्ट के गहन संशोधन (इंटेंसिव रिविज़न) की प्रक्रिया का कई दशकों का इतिहास रहा है। वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए, चुनाव आयोग ने अलग-अलग चरणों में वोटर लिस्ट का गहन संशोधन किया है।"

महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने सोमवार को वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) के चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) का बचाव करते हुए इसे “एक व्यापक और लंबे समय से चली आ रही नियमित प्रक्रिया का अगला चरण” बताया।

CM Fadnavis ने कहा कि इस प्रक्रिया का कई दशकों का इतिहास रहा है और यह सटीक व भरोसेमंद वोटर डेटा सुनिश्चित करने का एक स्थापित तरीका है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट में,CM Fadnavis ने भारत में वोटर लिस्ट में संशोधन के ऐतिहासिक पड़ावों का ज़िक्र किया और बताया कि आज़ादी के बाद से कई चरणों में गहन संशोधन किए गए हैं।

CM Fadnavis बोले, SIR पुरानी प्रक्रिया

CM Fadnavis ने कहा, “भारत की चुनावी व्यवस्था में वोटर लिस्ट के गहन संशोधन (इंटेंसिव रिविज़न) की प्रक्रिया का कई दशकों का इतिहास रहा है। वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए, चुनाव आयोग ने अलग-अलग चरणों में वोटर लिस्ट का गहन संशोधन किया है।”

पिछली प्रक्रियाओं की समय-सीमा बताते हुए, CM Fadnavis ने कहा कि “1952 और 1956 के बीच, चुनाव आयोग ने देश के ज़्यादातर हिस्सों में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव किए।

इसके बाद, 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी देश के ज़्यादातर हिस्सों में बदलाव किए गए। 1983–84, 1987–89, 1992, 1993 और 1995 के दौरान भी बदलाव किए गए।

चुनाव आयोग ने 2002, 2003 और 2004 में फिर से वोटर लिस्ट में बदलाव किए। बड़े पैमाने पर बदलाव करने की प्रक्रिया में घर-घर जाकर वोटरों से जानकारी इकट्ठा करना, एन्यूमरेशन फ़ॉर्म बांटना और इकट्ठा करना, और वोटर रिकॉर्ड की जांच करना शामिल है।

इस तरह के बड़े बदलाव में, एन्यूमरेशन प्रक्रिया के ज़रिए वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार किया जाता है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिछले दो दशकों में आबादी में हुए बदलावों के कारण समय-समय पर गहराई से जांच करना ज़रूरी हो गया है।

Priyank Kharge ने EVM की सुरक्षा की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की।

शहरीकरण से बदली वोटर लिस्ट

उन्होंने कहा, “तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और नागरिकों के बार-बार एक जगह से दूसरी जगह जाने की वजह से वोटर लिस्ट में भी काफ़ी बदलाव आए हैं। पिछले 20 सालों में, वोटर लिस्ट में बहुत सारे नाम जोड़े और हटाए गए हैं।

समय के साथ, नए योग्य वोटरों के जुड़ने, मौतों, पलायन और एक जगह से दूसरी जगह रजिस्ट्रेशन कराने की वजह से वोटर लिस्ट में लगातार बदलाव होते रहते हैं। इसलिए, समय-समय पर गहराई से जांच करना ज़रूरी हो जाता है।”

इस कवायद के मकसद पर ज़ोर देते हुए फडणवीस ने कहा, “योग्य नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल करना और यह पक्का करना कि कोई भी योग्य नागरिक छूट न जाए, चुनाव आयोग के अहम मकसदों में से एक है।

सघन समीक्षा (intensive revision) के ज़रिए वोटर लिस्ट की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखना चुनावी सिस्टम की एक पुरानी प्रक्रिया है। मौजूदा ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) इसी व्यापक प्रक्रिया का अगला चरण है।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी पार्टियां आगामी चुनावों से पहले चल रही वेरिफिकेशन प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रही हैं।

इससे पहले, रविवार को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने BMC मुख्यालय की ओर एक संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया।

ECI विवाद पर Shivraj Singh Chouhan का Congress पर हमला

SIR को लेकर CEC पर सवाल

उन्होंने वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार को निशाना बनाया और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए।

यह विरोध मार्च चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हुआ। विपक्षी पार्टियों ने समीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी अहम फाइलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

इन आपत्तियों में फॉर्म 6, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया कि इन आपत्तियों का मतलब अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति था।

चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी मानक प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। ECI ने कहा कि SIR प्रक्रिया के शेड्यूल से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

Related Articles

Back to top button