Diabetes को कंट्रोल करने के आसान तरीके, जानें कारण, लक्षण और बचाव
टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। पर्याप्त नींद लेना, तनाव को नियंत्रित रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।

Diabetes यानी मधुमेह आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। आम बोलचाल में इसे शुगर की बीमारी कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर में ब्लड शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।
अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे, तो इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। हालांकि, सही खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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Diabetes क्या है?
शरीर को ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। इंसुलिन नामक हार्मोन ग्लूकोज को रक्त से शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है।
जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है। इसी स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है।
डायबिटीज के कई प्रकार हैं। टाइप-1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता। टाइप-2 डायबिटीज सबसे आम प्रकार है, जिसमें शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता। गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है।
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Diabetes के सामान्य लक्षण
डायबिटीज के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। बार-बार पेशाब आना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, अधिक भूख लगना और लगातार थकान महसूस होना इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं।
इसके अलावा बिना वजह वजन कम होना, धुंधला दिखाई देना, घाव का धीरे भरना और बार-बार संक्रमण होना भी डायबिटीज के लक्षण हो सकते हैं।
टाइप-2 डायबिटीज कई बार धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में कोई खास लक्षण नजर नहीं आता। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनमें डायबिटीज का जोखिम अधिक है।
Diabetes के प्रमुख कारण
टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कई कारणों से बढ़ सकता है। अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान, परिवार में डायबिटीज का इतिहास और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
लंबे समय तक बैठे रहना और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ मीठा खाने से ही डायबिटीज नहीं होती। इसके पीछे आनुवंशिक, शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक हो सकते हैं।
खान-पान में रखें सावधानी
डायबिटीज को नियंत्रित रखने में संतुलित आहार की अहम भूमिका होती है। भोजन में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, फाइबर और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। मीठे पेय, अतिरिक्त चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना चाहिए।
भोजन की मात्रा और समय का ध्यान रखना भी जरूरी है। डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुसार डाइट डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह से तय करनी चाहिए।
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नियमित व्यायाम है जरूरी
शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, योग या डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य व्यायाम दिनचर्या में शामिल किए जा सकते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना भी अच्छी आदत है।
जो लोग दवा या इंसुलिन लेते हैं, उन्हें व्यायाम में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
नियमित जांच और दवा
डायबिटीज की निगरानी के लिए डॉक्टर ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। HbA1c से पिछले कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर का आकलन करने में मदद मिलती है।
अगर डॉक्टर ने दवा या इंसुलिन की सलाह दी है, तो उसे निर्धारित तरीके से लेना चाहिए। अपनी मर्जी से दवा बंद करना या उसकी मात्रा बदलना सही नहीं है।
Diabetes से बचाव कैसे करें?
टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। पर्याप्त नींद लेना, तनाव को नियंत्रित रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।
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