Saurabh Bhardwaj ने Delhi में कथित अवैध PG को लेकर BJP विधायक पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, "यह साफ़ है कि ऐसे हालात में, आम नागरिकों या पड़ोसियों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे लिखित शिकायतों पर कार्रवाई करेंगे और इलाके के ताकतवर नेताओं से भिड़ेंगे।"

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bhardwaj ने सत्य निकेतन में BJP विधायक अनिल शर्मा से जुड़े एक कथित अवैध PG के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
उनका आरोप है कि सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण और कब्ज़े की शिकायतों के बावजूद यह PG चल रहा था। भारद्वाज का कहना है कि इस PG का चलना सिस्टम की खामियों और सरकारी ज़मीन पर बने अवैध निर्माणों को मिलने वाले कथित राजनीतिक संरक्षण को उजागर करता है।
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Saurabh Bhardwaj बोले- अवैध PG को सिस्टम का संरक्षण
अपनी शिकायत के बारे में सौरभ भारद्वाज ने कहा, “यह मामला दिखाता है कि सिस्टम कैसे अवैध PG को बचाता है। यह PG सरकारी ज़मीन पर बनाया गया था और 2022 में इसके निर्माण के दौरान की गई लिखित शिकायतों को DDA, MCD और उपराज्यपाल (LG) के कार्यालय ने नज़रअंदाज़ कर दिया था।
अब यह शिकायत मुख्यमंत्री, LG, MCD और DDA को भेजी गई है। अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मैं कोर्ट जाऊंगा और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों को रखने वाले अवैध PG को बचाने वाले इस सड़े-गले सिस्टम का पर्दाफ़ाश करूंगा।”
MCD कमिश्नर को दी गई लिखित शिकायत में, AAP दिल्ली यूनिट के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने सरकारी ज़मीन पर कथित अवैध कब्ज़े, बिना मंज़ूरी के निर्माण और सत्य निकेतन (मोती बाग/नानकपुरा) से सटे अर्कपुर बाग मोची गाँव में प्रॉपर्टी नंबर 11/78, खसरा नंबर 225 पर बनी बिल्डिंग के PG के तौर पर कथित कमर्शियल इस्तेमाल की जाँच और कानून के मुताबिक कार्रवाई की माँग की।
Saurabh Bhardwaj ने कहा, “यह शिकायत दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के उसी स्टूडेंट PG इलाके में मौजूद प्रॉपर्टी के बारे में जनहित में दर्ज की गई है, जहाँ 6 सितंबर, 2026 को सत्य निकेतन की एक PG बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद, सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए जिनमें सत्य निकेतन के छात्र और वहाँ रहने वाले लोग यह कहते हुए दिखे कि MCD जैसी एजेंसियाँ अवैध और बिना मंज़ूरी वाले PG निर्माण के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में नाकाम रहती हैं, क्योंकि इस इलाके में ज़्यादातर PG ताकतवर नेताओं के हैं, जिनमें स्थानीय MLA अनिल शर्मा भी शामिल हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में यह भी कहा गया है कि स्थानीय गुंडे छात्रों को धमकी दे रहे थे क्योंकि उन्होंने PG बिज़नेस में MCD और नेताओं के बीच कथित मिलीभगत के बारे में मीडिया से बात की थी।
उन्होंने कहा, “यह साफ़ है कि ऐसे हालात में, आम नागरिकों या पड़ोसियों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे लिखित शिकायतों पर कार्रवाई करेंगे और इलाके के ताकतवर नेताओं से भिड़ेंगे।”
Saurabh Bhardwaj ने MCD की भूमिका पर उठाए सवाल
उन्होंने आगे कहा, “यह मामला सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़े और खुलेआम अनधिकृत निर्माण को मिल रहे राजनीतिक संरक्षण का सीधा उदाहरण है। यह MCD जैसी एजेंसियों की निष्क्रियता और मिलीभगत को भी दिखाता है, जो अवैध और अनधिकृत निर्माण को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही हैं।”
Saurabh Bhardwaj ने पत्र में आगे कहा, “MCD साउथ ज़ोन ऑफिस से मिले रिकॉर्ड और दस्तावेज़ों के अनुसार, आवेदक ने MCD से बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी पाने के लिए ज़मीन/प्लॉट के लिए DDA कन्वेयंस डीड के रूप में एक दस्तावेज़ अपलोड किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “चुल्हा-टैक्स-पेयर स्कीम के तहत अंकित शर्मा के नाम पर रजिस्टर्ड 18 अप्रैल, 2016 के कन्वेयंस डीड (रजिस्ट्री नंबर 5601, सब-रजिस्ट्रार-7) के अनुसार, प्लॉट का साइज़ सिर्फ़ 230.74 स्क्वायर यार्ड (193 स्क्वायर मीटर) है।
MCD के OBPS पोर्टल (रिक्वेस्ट ID 10107131) पर मंज़ूर बिल्डिंग प्लान के मुताबिक, बेसमेंट, स्टिल्ट और तीन मंज़िलों के लिए 75% एरिया कवरेज की इजाज़त थी, जो हर मंज़िल के लिए 144.720 स्क्वायर मीटर होता है।”
AAP दिल्ली यूनिट के प्रमुख ने यह भी बताया कि कंस्ट्रक्शन की अवधि 3 नवंबर, 2022 के बाद तक बताई गई थी और बिल्डिंग का इस्तेमाल सिर्फ़ रहने के मकसद से किया जाना था। उन्होंने कहा, “DDA कन्वेयंस डीड में भी सिर्फ़ रहने के मकसद से इस्तेमाल की इजाज़त है।
लेकिन, 2022-23 में बनी बिल्डिंग लगभग 600 स्क्वायर यार्ड में फैली हुई है। हैरानी की बात है कि स्थानीय निवासियों और उस समय के MLA की शिकायतों के बावजूद MCD और पुलिस अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।”
Saurabh Bhardwaj ने आगे कहा, “ध्यान देने वाली बात यह है कि MCD से बिल्डिंग प्लान को मंज़ूरी मिलने से पहले ही इमारत का निर्माण शुरू हो चुका था। 22 सितंबर, 2022 को विधायक प्रमिला टोकस ने अंबेडकर कल्याण समिति की शिकायत LG, MCD कमिश्नर, DC साउथ ज़ोन MCD, SHO साउथ कैंपस और अन्य अधिकारियों को भेजी।”
उन्होंने बताया, “शिकायत में साफ़ तौर पर कहा गया था कि साइट पर लगभग 2,000 वर्ग गज ज़मीन पर एक होटल/गेस्ट-हाउस कॉम्प्लेक्स का अवैध निर्माण हो रहा था, जिसमें खाली DDA/सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा किया गया था।
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LG सचिवालय ने DDA को भेजी थी शिकायत: Saurabh Bhardwaj
LG सचिवालय ने उचित कार्रवाई के लिए 16 अक्टूबर, 2022 को यह शिकायत DDA के वाइस-चेयरमैन को भेज दी।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि चार साल बाद भी किसी कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा, “अवैध निर्माण के बारे में शिकायत दर्ज होने के बाद, 30 सितंबर, 2022 को बिल्डिंग प्लान की फ़ीस का भुगतान किया गया था।”AAP के सीनियर नेता ने बताया कि M/s केष्टो गैदर होम्स प्राइवेट लिमिटेड के तीन लगभग बराबर हिस्सेदार हैं:
वैभव दीक्षित (34% हिस्सेदारी), जो मौजूदा MLA अनिल शर्मा के बेटे हैं; विनेश दीक्षित (33% हिस्सेदारी), जो MLA अनिल शर्मा के भतीजे हैं; और प्रगुन बब्बर (33% हिस्सेदारी), जो राजीव बब्बर के बेटे हैं (राजीव बब्बर एक जाने-माने राजनेता और DDA के सदस्य हैं)।
Saurabh Bhardwaj ने कहा, “इसका मतलब है कि MLA अनिल शर्मा के पिता ने वह प्रॉपर्टी उस कंपनी को लीज़ पर दी, जिसे MLA अनिल शर्मा के बेटे चलाते हैं।” उन्होंने बताया कि 230 वर्ग गज के प्लॉट के लिए मंज़ूर रिहायशी प्लान और 75% तक कवरेज की इजाज़त के बावजूद, यह PG लगभग 600 वर्ग गज ज़मीन पर बनाया गया था।
इसमें मुख्य रूप से दिल्ली की रिंग रोड के किनारे मौजूद सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा शामिल है। उन्होंने आगे कहा, “इमारत का दौरा करने वाला कोई भी अधिकारी या टीम देख सकती है कि यह PG पूरी PWD रिंग रोड सर्विस लेन और दूसरी सरकारी ज़मीन पर बना हुआ है। रिंग रोड से गुज़रने वाला कोई भी व्यक्ति मोती बाग गुरुद्वारे के पास इस कब्ज़े वाली जगह को देख सकता है।”
Saurabh Bhardwaj ने कहा, “सत्य निकेतन हादसे के बाद, MCD कमिश्नर के ऑफिस और मुख्यमंत्री ने शहर भर की सभी PG बिल्डिंग का सर्वे करने और अनधिकृत/गैर-कानूनी PG बिल्डिंग को सील करने का आदेश दिया था। हालाँकि मैं सोशल मीडिया और मीडिया में इस बिल्डिंग का मुद्दा उठाता रहा हूँ, लेकिन MCD समेत किसी भी विभाग ने इस बिल्डिंग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।”
इसलिए, Saurabh Bhardwaj ने कहा कि उन्होंने ऊपर बताई गई जगह का तुरंत निरीक्षण करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, “बिल्डिंग के असल कवरेज को मंज़ूर किए गए प्लान और आवेदक द्वारा अपलोड किए गए
DDA लीज़ डीड के आधार पर मापा जाना चाहिए। कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच होनी चाहिए, और उसी तरह से गिराने की कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए जैसा MCD ने मीडिया और सोशल मीडिया पर दिखाया है।”
Saurabh Bhardwaj ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस प्रक्रिया के दौरान छात्रों और निवासियों की सुरक्षा और उन्हें सम्मानजनक तरीके से दूसरी जगह बसाना पक्का किया जाना चाहिए। अगर MCD तुरंत गिराने की कार्रवाई करती है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और कानून के सामने सब बराबर हैं।”
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