Kesavan का दावा है कि Rahul Gandhi का ‘SIR’ नैरेटिव फेल हो गया है।
राहुल गांधी ने गुरुवार को "100 प्रतिशत यकीन" के साथ आरोप लगाया कि भारत में चुनाव, जिनमें 2024 के लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव शामिल हैं, उनमें "धांधली" हुई थी।

बीजेपी नेता सीआर केसवन ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) पर Rahul Gandhi के आरोपों का जवाब देते हुए केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला द्वारा SIR प्रक्रिया की तारीफ किए जाने का ज़िक्र किया।
‘X’ पर एक पोस्ट में केसवन ने कहा कि Rahul Gandhi का यह दावा कि “जहां भी SIR होता है, वहां वोट की चोरी होती है”, खुद चेन्निथला के बयान से गलत साबित होता है।
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SIR पर Rahul Gandhi के दावे पर Keshavan का पलटवार
उन्होंने कहा कि 4 मई को केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद चेन्निथला ने इस प्रक्रिया की तारीफ की थी। उन्होंने कहा, “राहुल Rahul Gandhi बेतुका दावा करते हैं कि जहां भी SIR होता है, वहां वोट की चोरी होती है।
4 मई को जब केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए, तो केरल के तत्कालीन कांग्रेस गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस बात की तारीफ की थी कि कैसे SIR प्रक्रिया ने वोटर लिस्ट से फर्जी वोट हटाकर कांग्रेस को जीतने में मदद की थी।”
रमेश चेन्निथला ने केरल चुनाव में हरिपाद विधानसभा सीट जीती। उन्हें 68,184 वोट मिले और उन्होंने अपने सबसे करीबी CPI प्रतिद्वंद्वी को 23,377 वोटों से हराया। SIR प्रक्रिया पर गांधी की कल की टिप्पणी का ज़िक्र करते हुए केसवन ने कहा, “यह राहुल गांधी की कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस को पूरी तरह से गलत साबित करता है और खारिज करता है।
क्या Rahul Gandhi अब केरल के कांग्रेस गृह मंत्री से SIR की सार्वजनिक रूप से तारीफ़ करने के लिए इस्तीफ़ा मांगेंगे? क्या राहुल गांधी को लगता है कि केरल विधानसभा चुनाव, जिसे कांग्रेस ने जीता, उसमें कोई गड़बड़ी हुई थी?” केसवन ने संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करने को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, “जब भी Rahul Gandhi का राजनीतिक कद सबसे निचले स्तर पर होता है, तो वे ध्यान भटकाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर खुलेआम निशाना साधते हैं। इससे पहले, राहुल गांधी ने ऐसी ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी जिसमें उन्होंने ‘हाइड्रोजन बम’ जैसी बेतुकी बातें कही थीं, जो बाद में बेअसर साबित हुईं।”
केशवन ने आगे कहा, “लगातार तीन लोकसभा चुनावों और लगभग 100 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की शर्मनाक हार के लिए राहुल गांधी सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं।
कल हुई तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस पार्टी की चुनावी हार का दोष मढ़ने के लिए किसी बलि का बकरा खोजने और अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की राहुल गांधी की एक हताश कोशिश के अलावा और कुछ नहीं थी।”
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Rahul Gandhi बोले- 2024 चुनावों में हुई गड़बड़ी
राहुल गांधी ने गुरुवार को “100 प्रतिशत यकीन” के साथ आरोप लगाया कि भारत में चुनाव, जिनमें 2024 के लोकसभा चुनाव और कई राज्यों के विधानसभा चुनाव शामिल हैं, उनमें “धांधली” हुई थी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह “इस साजिश के मुख्य सूत्रधार” थे और उन्हें जांच का सामना करना पड़ेगा।
गांधी ने कहा, “हम सबसे पहले यह कह रहे हैं कि श्री ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए… आपने जो किया है, वह भारतीय राष्ट्र के खिलाफ एक काम है… जो व्यक्ति वोट पर हमला करता है, जो भारत के लोकतांत्रिक संस्थान को बुनियादी तौर पर नष्ट करता है, वह ‘देशद्रोही’ के अलावा और कुछ नहीं है।”
उन्होंने CEC से “सरकारी गवाह” (approver) बनने की भी अपील की। गांधी ने तर्क दिया कि वोट, संविधान, कानून और संस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया से समझौता किया गया है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज कर दिया कि दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति को दर्शाती हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्टिंग के चरण के दौरान कामकाज से जुड़े सवाल, आंतरिक फीडबैक और प्रशासनिक सुझाव एक सामान्य प्रक्रिया है।
ECI बोला- SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
ECI ने कहा कि तीन सदस्यीय आयोग द्वारा लिए गए सभी अंतिम फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए थे। गुरुवार को बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने उनके तर्कों को पुरानी बातें बताकर खारिज कर दिया और एंटी-इंकम्बेंसी (सत्ता-विरोधी लहर) के बारे में उनके दावों पर सवाल उठाए, जबकि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव आयोग के कामकाज का बचाव किया और कहा कि चुनाव आयोग में फैसले बहुमत या आम सहमति से लिए जाते हैं।
नई दिल्ली में 29 सितंबर को होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में SIR और चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके को लेकर विवाद उठने की उम्मीद है।
चुनाव आयोग ने कहा है कि ECINet एक सुरक्षित और डिसेंट्रलाइज़्ड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है, जिसे ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951’ के तहत शुरू किया गया था।
आयोग ने बताया कि ECINet पर ज़रूरी काम BLO, AERO, ERO, DEO और CEO जैसे तय चुनाव अधिकारी करते हैं, जो इसके लिए यूनिक ID और सुरक्षित क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करते हैं।
चुनाव आयोग ने पिछले साल वोटर लिस्ट को ठीक करने के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (खास सघन समीक्षा) शुरू किया था। इसके तहत वोटरों ने चुनाव अधिकारियों से प्रोसेस करवाने के लिए ECINet के ज़रिए फ़ॉर्म और डॉक्यूमेंट जमा किए थे।
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