Shivraj Singh Chauhan ने किसानों की समृद्धि के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर दिया जोर
अलग-अलग राज्यों में विकसित सफल मार्केटिंग मॉडल और किसानों को बेहतर दाम दिलाने की पहलों की भी समीक्षा की गई। बैठक में नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत नेचुरल फ़ार्मिंग की प्रगति की समीक्षा की गई।

कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chauhan ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ (NMNF) की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
यह जानकारी कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन, मिट्टी की सेहत के प्रबंधन, ट्रेनिंग, रिसर्च, मार्केट लिंकेज, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और प्राकृतिक खेती के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
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प्राकृतिक खेती मिशन के लक्ष्यों पर हुई समीक्षा
बैठक के दौरान, प्राकृतिक खेती में अब तक हुई प्रगति, अलग-अलग राज्यों में चल रही गतिविधियों, किसानों की भागीदारी और मिशन के तहत आने वाले लक्ष्यों पर एक प्रेजेंटेशन दिया गया।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि अभी देश भर में 24 लाख से ज़्यादा किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और 2030 तक 85 लाख किसानों को ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि मिशन के अगले चरणों में प्राकृतिक खेती के विस्तार को और तेज़ी दी जाए। बैठक के दौरान, Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि प्राकृतिक खेती को सिर्फ़ खेती के एक तरीक़े के तौर पर नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने,
खेती की लागत कम करने और खेती को ज़्यादा टिकाऊ बनाने के एक असरदार ज़रिया के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्राकृतिक खेती से किसानों को होने वाले असल फ़ायदों का व्यापक और वैज्ञानिक आकलन करें।
उन्होंने कहा कि किसानों की उत्पादकता, उत्पादन लागत, बाज़ार भाव और शुद्ध आय का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह साफ़ तौर पर दिखाया जा सके कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कैसे फ़ायदेमंद साबित हो रही है।
Shivraj Singh Chauhan आगे कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए, लागत कम करने और उपज के लिए बेहतर दाम सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
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खेती के फायदे आंकड़ों से होंगे स्पष्ट
Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि प्राकृतिक खेती से होने वाले आर्थिक और पर्यावरणीय फ़ायदों का साफ़ रिकॉर्ड बनाने के लिए किसानों के अनुभव, वैज्ञानिक अध्ययन और ज़मीनी स्तर के डेटा को इकट्ठा करके एक विस्तृत विश्लेषण तैयार किया जाना चाहिए।
कृषि मंत्री ने बताया कि दुनिया भर में प्राकृतिक और केमिकल-मुक्त कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत के किसानों के पास इस बढ़ती मांग का फ़ायदा उठाने का एक बड़ा मौका है।
उन्होंने ज़ोर दिया कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की मज़बूत ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन, सर्टिफ़िकेशन और मार्केट लिंकेज के ज़रिए किसानों की आय में काफ़ी बढ़ोतरी की जा सकती है।
बैठक में प्राकृतिक खेती वाले उत्पादों की मार्केटिंग, निर्यात की संभावनाओं और अलग-अलग राज्यों द्वारा विकसित सफल मार्केट मॉडल पर भी चर्चा हुई। साथ ही, प्राकृतिक खेती वाले उत्पादों के लिए एक मज़बूत वैल्यू चेन बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया।
बैठक में ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ प्रोग्राम की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रेजेंटेशन में अलग-अलग राज्यों द्वारा मिट्टी के सैंपल इकट्ठा करने, उनकी जांच करने और सॉइल हेल्थ कार्ड बनाने के काम के बारे में जानकारी दी गई।
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मिट्टी डेटा संग्रह पर चौहान का जोर
Shivraj Singh Chauhan ने ज़ोर दिया कि प्राकृतिक खेती के असर को मापने और एक वैज्ञानिक आधार तैयार करने के लिए मिट्टी की सेहत से जुड़े डेटा को व्यवस्थित रूप से इकट्ठा करना बहुत ज़रूरी है।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेतों की मिट्टी की स्थिति की नियमित रूप से जांच की जाए और भविष्य की योजना बनाने की प्रक्रियाओं में उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल किया जाए।
इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्राकृतिक खेती के असर का आकलन करने और किसानों को पोषक तत्वों के सही प्रबंधन के बारे में सलाह देने में सॉइल हेल्थ कार्ड अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक में PGS-इंडिया नेचुरल सर्टिफ़िकेशन सिस्टम के तहत किसानों के रजिस्ट्रेशन और सर्टिफ़िकेशन की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रेजेंटेशन से पता चला कि 80,034 किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है।
इसके अलावा, कुल 262 FPO–जिनमें 100 नेचुरल फ़ार्मिंग पर आधारित FPO और 162 ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग पर आधारित FPO शामिल हैं–को सर्टिफ़िकेशन सिस्टम में शामिल किया गया है।
सर्टिफ़िकेशन प्रोसेस को और असरदार बनाने, किसानों की बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने और FPO के ज़रिए नेचुरल फ़ार्मिंग उत्पादों की मार्केटिंग को मज़बूत करने पर चर्चा हुई।
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नमामि गंगे के तहत प्राकृतिक खेती की समीक्षा
अलग-अलग राज्यों में विकसित सफल मार्केटिंग मॉडल और किसानों को बेहतर दाम दिलाने की पहलों की भी समीक्षा की गई। बैठक में नमामि गंगे प्रोग्राम के तहत नेचुरल फ़ार्मिंग की प्रगति की समीक्षा की गई।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 45 ज़िलों में, 777 क्लस्टर के ज़रिए 97,125 किसानों को नेचुरल फ़ार्मिंग से जोड़ा गया है, जिससे 38,850 हेक्टेयर ज़मीन इसके दायरे में आ गई है।
नमामि गंगे क्षेत्र में नेचुरल फ़ार्मिंग के विस्तार, किसानों की ट्रेनिंग और सफल मॉडलों के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। चौहान ने ज़ोर दिया कि मॉडल फ़ार्म का इस्तेमाल करके सफल प्राकृतिक खेती के तरीकों को ज़्यादा से ज़्यादा किसानों तक पहुँचाया जाना चाहिए।
Shivraj Singh Chauhanनिर्देश दिया कि किसानों के लिए नियमित फ़ील्ड विज़िट आयोजित की जानी चाहिए ताकि वे प्राकृतिक खेती के सफल उदाहरणों को खुद देख सकें और उनसे सीख सकें।
Shivraj Singh Chauhan कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों द्वारा विकसित मॉडल फ़ार्म को ज्ञान और प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाने से जुड़े प्रयासों की समीक्षा की गई। Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि कृषि के छात्रों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाना चाहिए ताकि भविष्य के कृषि विशेषज्ञ इस क्षेत्र में किसानों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।
Shivraj Singh Chauhan का प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग पर जोर
Shivraj Singh Chauhan निर्देश दिया कि कृषि शिक्षण संस्थानों में प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फ़ील्ड प्रदर्शनों और व्यावहारिक सीखने की गतिविधियों को और मज़बूत किया जाए।
प्राकृतिक खेती के लिए ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ (उत्कृष्टता केंद्र) बनाने के प्रस्ताव पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। Shivraj Singh Chauhan ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रिसर्च, इनोवेशन, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग को और बढ़ाने के लिए इन सेंटर्स को स्थापित करने से जुड़ी प्रक्रियाओं को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करें।
प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों की आय में बढ़ोतरी, मिट्टी की सेहत में सुधार, सर्टिफिकेशन, ट्रेनिंग, रिसर्च और मार्केट लिंकेज जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई और संबंधित अधिकारियों को ज़रूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए।
Shivraj Singh Chauhan ने कहा कि प्राकृतिक खेती को एक बड़े जन-आंदोलन के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके, खेती की लागत कम की जा सके और देश में टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा सके।
समीक्षा बैठक में कृषि और किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्र, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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