Jairam Ramesh ने E20 पॉलिसी पर केंद्र को घेरा, कहा- जनता भुगत रही कीमत
रमेश ने केंद्र की E20 पॉलिसी की भी आलोचना की, जिसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पॉलिसी की वजह से खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें बढ़ी हैं और साथ ही गाड़ियों की माइलेज और परफॉर्मेंस पर भी बुरा असर पड़ा है।

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने शुक्रवार को 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) लागू करने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि मोदी सरकार के फैसलों ने जनता के लिए खाने-पीने की चीज़ों और यात्रा, दोनों को महंगा बना दिया है।
‘X’ पर एक पोस्ट में Jairam Ramesh ने कहा, “अहंकारी मोदी सरकार के गलत फैसलों की वजह से जनता को महंगे खाने और महंगी यात्रा, दोनों की कीमत चुकानी पड़ रही है।”
Jairam Ramesh ने केंद्र की E20 पॉलिसी की भी आलोचना की, जिसके तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस पॉलिसी की वजह से खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें बढ़ी हैं और साथ ही गाड़ियों की माइलेज और परफॉर्मेंस पर भी बुरा असर पड़ा है।
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E20 पॉलिसी पर Jairam Ramesh का केंद्र पर हमला
उन्होंने कहा, “मोदी सरकार की दूरदर्शिता की कमी वाली और जन-विरोधी E20 पॉलिसी के कारण एक तरफ महंगाई बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ गाड़ी मालिकों को कम माइलेज और गाड़ियों के खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जनता को इसकी कीमत सड़कों और रसोई, दोनों जगहों पर चुकानी पड़ रही है।”
पॉलिसी को लेकर अपनी चिंताएं बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने और अनाज का इस्तेमाल करने से खाने-पीने की चीज़ों की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है, जबकि जो गाड़ियां E20 के लिए नहीं बनी हैं, उनकी माइलेज कम हो सकती है।
उन्होंने कहा, “यह स्वाभाविक है कि जब गन्ने और अनाज से इथेनॉल बनाकर उसे पेट्रोल में 20% तक मिलाया जाएगा, तो एक तरफ गन्ने और अनाज से बनने वाले उत्पादों की कमी होगी, वहीं दूसरी तरफ जो गाड़ियां 20% इथेनॉल के हिसाब से नहीं बनी हैं, उनके खराब होने का खतरा भी होगा।
सही टेस्टिंग के बिना गाड़ियों का माइलेज भी कम हो जाएगा।”Jairam Ramesh ने आगे कहा कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल किए जाने से चीनी और गुड़ की कीमतें बढ़ी हैं।
आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा, “अब यह साफ है कि 25 लाख टन चीनी के बराबर गन्ना इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हुआ है, जिसके कारण पिछले तीन महीनों में ही चीनी की कीमत ₹48 से बढ़कर ₹67 प्रति किलो और गुड़ की कीमत ₹50 से बढ़कर ₹65 प्रति किलो हो गई है।
चावल और मक्के का आटा भी क्रमशः 16% और 11% महंगा हो गया है। पशुओं के चारे की कीमत में भी 10.34% की बढ़ोतरी हुई है।” कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी उठाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और इथेनॉल ब्लेंडिंग से हुई बचत के बावजूद पेट्रोल की कीमतें क्यों नहीं कम हुईं।
E20 पर Jairam Ramesh का आरोप, वाहन मालिकों के विकल्प सीमित किए गए
Jairam Ramesh ने कहा, “बिना सोचे-समझे, इथेनॉल बनाने वाले अपने दोस्तों को ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा पहुँचाने के लिए गाड़ी मालिकों के पास पेट्रोल के विकल्प सीमित कर दिए गए हैं, लेकिन E20 के साथ गाड़ियों की माइलेज और कम्पैटिबिलिटी को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।
यह हैरानी की बात है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और 20% इथेनॉल मिलाने से लागत कम होने के बावजूद, पेट्रोल की कीमतों में कोई कमी नहीं आई है।”
Jairam Ramesh ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने E20 पॉलिसी और इससे जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर बार-बार चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार E20 के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करते रहे हैं।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को ही E20 के कारण कम माइलेज, गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी से जुड़े जोखिम, ग्राहकों के लिए सीमित विकल्प और पर्यावरण को नुकसान पहुँचने जैसे सवालों पर अपनी चिंता ज़ाहिर की थी।”
उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि E20 पॉलिसी की तुरंत समीक्षा की जाए और लोगों को बिना इथेनॉल वाले विकल्प दिए जाएं। ऐसी जन-विरोधी ईंधन नीति, जिससे कार और रसोई, दोनों का खर्च बढ़ जाए, देश को मंजूर नहीं हो सकती।”
कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इथेनॉल मिलाने से वाहन मालिकों, ईंधन की कीमतों और कृषि उत्पादों के दामों पर पड़ने वाले असर को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
इस बीच, 15 अगस्त को सरकार ने कहा कि वाहनों के माइलेज में बदलाव के लिए सिर्फ़ E20 पेट्रोल को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि असल में ईंधन की खपत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे गाड़ी चलाने का तरीका, ट्रैफ़िक की स्थिति, गाड़ी का रखरखाव, टायर का प्रेशर और एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने E20 की टेस्टिंग को बताया व्यापक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि E20 की बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और वैलिडेशन की गई है। साथ ही, मंत्रालय ने उन कई कारकों का भी ज़िक्र किया जो किसी गाड़ी की माइलेज तय करते हैं।
मंत्रालय ने कहा, “माइलेज सिर्फ़ ईंधन पर निर्भर नहीं करता। गाड़ी चलाने का तरीका, ट्रैफ़िक, गाड़ी का रखरखाव, टायर का प्रेशर और AC का इस्तेमाल – ये सभी इसमें भूमिका निभाते हैं।”
मंत्रालय ने आगे कहा, “E20 की बड़े पैमाने पर टेस्टिंग और वैलिडेशन की गई है, जबकि असल ज़िंदगी में माइलेज गाड़ी चलाने के तरीके और गाड़ी की स्थिति पर निर्भर करता है।”
सरकार की ओर से यह ताज़ा स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब गाड़ी मालिकों के मन में 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के माइलेज, गाड़ी की परफ़ॉर्मेंस और कम्पैटिबिलिटी पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बनी हुई है।
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