Derealization Disorder: क्यों लगता है सब कुछ अवास्तविक?
क्या आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि आपके आसपास की दुनिया अचानक सपने जैसी या अवास्तविक लगने लगी है?

कभी-कभी आसपास की दुनिया अचानक अजीब, धुंधली या सपने जैसी महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि वे अपने परिचित वातावरण को देख तो रहे हैं, लेकिन वह उन्हें वास्तविक नहीं लग रहा। इस अनुभव को Derealization (डीरियलाइजेशन) कहा जाता है।
यह अपने आप में हमेशा कोई अलग बीमारी नहीं होती, बल्कि कई मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों या अत्यधिक तनाव के साथ दिखाई देने वाला एक अनुभव हो सकता है।
जब डीरियलाइजेशन बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बना रहे और व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, तो इसे गंभीरता से समझना जरूरी है।
लगातार रहने वाले डीरियलाइजेशन और डिपर्सनलाइजेशन से जुड़ी स्थिति को Depersonalization/Derealization Disorder (DPDR) कहा जाता है।
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Derealization क्या होता है?
Derealization में व्यक्ति को अपने आसपास की दुनिया असली होने के बावजूद अवास्तविक या सपने जैसी महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को चीजें दूर, धुंधली या असामान्य रूप से साफ दिखाई देने जैसी अनुभूति होती है। कभी-कभी आवाजें भी अलग या दूर से आती हुई लग सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि डीरियलाइजेशन का अनुभव करने वाला व्यक्ति आमतौर पर यह समझता रहता है कि उसकी अनुभूति वास्तविकता नहीं बदली है। यानी उसे पता होता है कि दुनिया वास्तव में वैसी ही है, लेकिन उसे वैसी महसूस नहीं हो रही।
इसके सामान्य लक्षण क्या हैं?
डीरियलाइजेशन अलग-अलग लोगों में अलग तरीके से महसूस हो सकता है। इसके कुछ सामान्य अनुभव हैं:
- आसपास का वातावरण सपने या फिल्म जैसा लगना
- परिचित जगहें अचानक अजनबी महसूस होना
- लोगों या वस्तुओं को भावनात्मक रूप से दूर महसूस करना
- आवाजों या रोशनी का सामान्य से अलग लगना
- समय के गुजरने का अनुभव बदल जाना
- चीजों के आकार या दूरी को लेकर अजीब अनुभूति होना
- अपने अनुभव को लेकर चिंता या डर पैदा होना
कुछ लोगों में इसके साथ Depersonalization भी हो सकता है, जिसमें व्यक्ति को खुद से अलग या अपने शरीर और भावनाओं से दूर होने जैसा महसूस होता है।
Derealization क्यों होता है?
डीरियलाइजेशन कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। अत्यधिक तनाव, चिंता, पैनिक अटैक, नींद की कमी या किसी बहुत परेशान करने वाली घटना के बाद कुछ लोगों में यह अनुभव हो सकता है।
कुछ मामलों में यह लंबे समय से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ भी दिखाई दे सकता है। शराब या कुछ अन्य पदार्थों का सेवन भी ऐसी अनुभूतियों को बढ़ा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका कारण एक जैसा नहीं होता।
क्या Derealization खतरनाक है?
डीरियलाइजेशन का अनुभव अपने आप में आमतौर पर व्यक्ति को वास्तविकता से स्थायी रूप से अलग नहीं करता। फिर भी, पहली बार ऐसा होने पर यह अनुभव काफी डरावना हो सकता है। व्यक्ति को लग सकता है कि उसके साथ कुछ गंभीर हो रहा है।
अगर ये अनुभव बार-बार हों, लंबे समय तक बने रहें या काम, पढ़ाई, रिश्तों और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित है।
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इसका इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज व्यक्ति के लक्षणों और उनके कारण पर निर्भर करता है। डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि डीरियलाइजेशन किन परिस्थितियों में होता है और क्या इसके पीछे चिंता, तनाव या कोई अन्य समस्या मौजूद है।
Psychotherapy (टॉक थेरेपी) कई लोगों के लिए मददगार हो सकती है। इसमें व्यक्ति अपने लक्षणों को समझना, चिंता और तनाव को संभालना तथा मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के तरीके सीख सकता है। यदि साथ में कोई अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या मौजूद हो, तो विशेषज्ञ उसके अनुसार उपचार की सलाह दे सकते हैं।
रोजमर्रा में क्या मदद कर सकता है?
नियमित नींद, पर्याप्त आराम, तनाव को कम करने की कोशिश और शराब या अन्य नशीले पदार्थों से बचना कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। डीरियलाइजेशन महसूस होने पर आसपास की चीजों पर ध्यान केंद्रित करना, धीरे-धीरे सांस लेना और अपने वर्तमान वातावरण को महसूस करना भी मदद कर सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि बार-बार होने वाले डीरियलाइजेशन को नजरअंदाज न करें। सही मूल्यांकन और उचित सहायता से इसके लक्षणों को समझना और उन्हें बेहतर तरीके से संभालना संभव है।
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