Jairam Ramesh ने फिर CEC Gyanesh Kumar से इस्तीफे की मांग की

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिससे लाखों नागरिकों के वोट देने का अधिकार छिन जाए और वे बिना वोटिंग अधिकार वाले "दूसरे दर्जे के नागरिक" बन जाएं, वह "मूल रूप से मनमानी" है।

इस पर कांग्रेस के सीनियर नेता Jairam Ramesh ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा है कि वोटरों को मनमाने ढंग से वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि SC जज ने चुनाव प्रमुख की पोल पूरी तरह से खोल दी है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि CEC देश के लिए “बोझ” बन गए हैं और आरोप लगाया कि वह “गैर-कानूनी आदेशों” का पालन कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में Jairam Ramesh ने लिखा, “हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में कल निडर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने CEC की पूरी पोल खोल दी।अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

Hyderabad कार्यक्रम के बाद Jairam Ramesh की प्रतिक्रिया

G2 के गैर-कानूनी आदेशों को लागू करने की उनकी क्षमता ने उन्हें देश के लिए बोझ बना दिया है।”Jairam Ramesh की यह तीखी प्रतिक्रिया रविवार को हैदराबाद में 19वीं NALSAR BRS मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में जस्टिस भुयन के भाषण के बाद आई है।

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि कोई भी ऐसी प्रक्रिया जिससे लाखों नागरिकों के वोट देने का अधिकार छिन जाए और वे बिना वोटिंग अधिकार वाले “दूसरे दर्जे के नागरिक” बन जाएं, वह “मूल रूप से मनमानी” है।

जस्टिस भुयन ने कहा था, “अगर किसी प्रक्रिया के कारण लाखों भारतीय नागरिकों के वोट देने का अधिकार छिन जाता है और वे अपने ही देश में बिना वोटिंग अधिकार वाले ‘दूसरे दर्जे के नागरिक’ बन जाते हैं, तो ऐसी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है। इसे किसी भी तरह के ‘लेकिन-मगर’ या दूसरे मुद्दों का हवाला देकर सही नहीं ठहराया जा सकता। यह संविधान की मूल भावना पर चोट करती है।”

यह बयान भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है, जिसमें विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार को निशाना बना रहा है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।

रविवार को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक विरोध मार्च निकाला। उन्होंने केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया और उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की।

इस मार्च की अगुवाई IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने की। भारी पुलिस तैनाती और रास्ते में बैरिकेडिंग के बीच, सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं ने प्लेकार्ड लिए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। चिब ने प्रदर्शनकारियों को तय विरोध स्थल की ओर मार्च करने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना की। चिब ने कहा, “सवाल यह है कि हम जंतर-मंतर जा रहे हैं।

Priyank Kharge ने EVM की सुरक्षा की स्वतंत्र ऑडिट की मांग की।

विरोध को लेकर Jairam Ramesh ने Modi, Shah पर निशाना साधा

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि अगर आप शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहते हैं, तो आपको जंतर-मंतर जाना होगा। लेकिन हमें जाने नहीं दिया जा रहा है क्योंकि मोदी और शाह को ज्ञानेश को बचाना है।

देश के इस गद्दार, ज्ञानेश, को बचाया नहीं जा सकता। हम जंतर-मंतर की ओर जाएंगे। जंतर-मंतर किसी के बाप की जागीर नहीं है। अगर वे हमें यहां रोकने की कोशिश करेंगे, तो हम वहीं बैठ जाएंगे। वे डरे हुए हैं; उनकी चोरी पकड़ी गई है। पिछले डेढ़ साल से राहुल गांधी देश के सामने इन चोरों की चोरी का पर्दाफाश कर रहे हैं, और अब और सबूत सामने आ रहे हैं।”

यह विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार चुनावी रोल, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्तियां जताई थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया कि बताई गई आपत्तियां अंतिम फैसलों पर संस्थागत असहमति थीं। चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी सामान्य प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। ECI ने कहा कि SIR प्रक्रिया के शेड्यूल से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

अन्य ख़बरों के लिए यहाँ क्लिक करें

Related Articles

Back to top button