Priyanka Gandhi ने SIR मामले में CEC के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की।

प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोई भी कोशिश संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा, “मेरा जवाब बहुत साफ़ है।

Priyanka Gandhi ने गुरुवार को कहा कि अगर वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया में कोई गैर-कानूनी काम हुआ है, तो इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों – जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं – पर आपराधिक मुक़दमा चलना चाहिए। उन्होंने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) को लेकर अपना हमला और तेज़ कर दिया।

कल्पेट्टा में पत्रकारों से बात करते हुए Priyanka Gandhi ने कहा कि चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोई भी कोशिश संविधान और देश के ख़िलाफ़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा, “मेरा जवाब बहुत साफ़ है।

Voter List विवाद पर Priyanka Gandhi का हमला

जो कोई भी हमारे चुनावों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है। यही हमारा बिल्कुल साफ़ रुख़ है।” कांग्रेस नेता ने गैर-कानूनी काम साबित होने की स्थिति में CEC को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि उस पद पर बैठे किसी व्यक्ति को—यानी मुख्य चुनाव आयुक्त को—तब भी कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, जब उन्होंने गैर-कानूनी काम किए हों।”Priyanka Gandhi ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना और बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाना एक गंभीर अपराध है।

उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ करना, 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना… लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ एक आपराधिक काम है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अगर CEC को गड़बड़ियों के बारे में पता था, साथी कमिश्नरों ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी और फिर भी उन्होंने इसे जारी रहने दिया, तो उन पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।

Priyanka Gandhi ने कहा, “अगर उन्होंने कोई गैर-कानूनी काम किया है, और उन्हें पूरी तरह पता था कि यह सब उनकी नाक के नीचे हो रहा है—उनके साथियों ने इस ओर उनका ध्यान भी दिलाया था, फिर भी उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ किया और जान-बूझकर एक अनुचित चुनाव होने दिया—तो उन पर किसी भी अन्य अपराधी की तरह आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए और उन पर देशद्रोह का मुक़दमा चलना चाहिए।”

उनकी यह टिप्पणी ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद मचे राजनीतिक विवाद के बीच आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची प्रक्रियाओं और SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं।

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आंतरिक जांच-पड़ताल पर चुनाव आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने इस बात को खारिज कर दिया है कि अंदरूनी चर्चाओं से उसके कामकाज पर कोई बुरा असर पड़ा। चुनाव आयोग ने कहा कि कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था में लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और अंदरूनी जांच-पड़ताल सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं।

ECI ने यह भी कहा कि आयोग के सभी आधिकारिक आदेशों और फैसलों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त थी और उनमें तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।

आयोग ने ड्राफ्टिंग के दौरान मिले सुझावों और सवालों को चुनावी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और वोटरों के अधिकारों की रक्षा करने की कोशिशों का हिस्सा बताया।

बीजेपी ने भी चुनाव आयोग का बचाव किया है; पार्टी नेताओं ने कमिश्नरों के बीच हुई अंदरूनी बातचीत को संस्थागत चर्चाओं का हिस्सा बताया है। हालांकि, विपक्षी पार्टियां SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाती रही हैं।

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