BJP की आपत्तियों पर Priyank Kharge का पलटवार, बोले- बिल पर खुली बहस करें
खरगे ने कहा कि विधेयक को भाजपा के विरोध-प्रदर्शन के कारण वापस नहीं लिया गया था और सरकार इसे चर्चा के लिए फिर से पेश करेगी।पब्लिक जगहों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े मुद्दे पर, खड़गे ने कहा कि यह मामला सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य का मुद्दा है जिस पर पब्लिक में चर्चा की ज़रूरत है।

कर्नाटक के गृह मंत्री Priyank Kharge ने गुरुवार को बीजेपी नेता आर. अशोक के उस दावे को खारिज कर दिया कि राज्य सरकार ने पार्कों सहित सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सीमित करने वाला ‘पार्क संशोधन बिल’ विपक्ष के दबाव में वापस लिया था।
मीडिया से बात करते हुए Priyank Kharge ने कहा कि बीजेपी नेता खुद को कुछ ज़्यादा ही अहम समझ रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह सरकार न तो उनके फैसलों या मनमर्जी से चलती है और न ही हमें उनकी बात मानने के लिए झुकना पड़ता है।
हमने सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पार्कों सहित सार्वजनिक जगहों की ज़मीन के इस्तेमाल से जुड़ा एक बिल पास किया था, जैसा कि राज्य में पिछली सरकारों के समय भी किया गया है।
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भूमि उपयोग बिल पर बहस से BJP का इनकार
इसलिए हम इसके लिए ज़मीन के इस्तेमाल को सीमित करने वाला एक बिल लाए थे। हम विधानसभा में इस पर बहस करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
हमने बहुत मिन्नतें कीं, उनसे बात करने की कोशिश की। कई बिल हैं, कई मुद्दे हैं, किसानों से जुड़े मुद्दे हैं; हम विधानसभा में इन पर बहस क्यों न करें? उन्होंने बस सदन की कार्यवाही चलने ही नहीं दी।”
उनके ये बयान तब आए हैं जब राज्य सरकार ने गुरुवार को प्रस्तावित ‘पार्क्स अमेंडमेंट बिल’ (पार्क संशोधन विधेयक) को फिलहाल वापस ले लिया है और चर्चा व सलाह-मशविरे के लिए इसे सार्वजनिक करने के बाद अगले विधानसभा सत्र में इसे फिर से पेश करेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस विधेयक को महत्वपूर्ण मानते थे और उनका मानना था कि इस पर व्यापक बहस की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “इसलिए आज हमने कैबिनेट में उस विधेयक को वापस ले लिया है, और हम इसे बहस के लिए विधानसभा में पेश कर रहे हैं।
हम विधेयक में एक भी पूर्ण विराम या अल्पविराम नहीं बदल रहे हैं। हम बहस के लिए तैयार हैं। अगर जनता की ओर से अच्छे सुझाव आते हैं, तो हम उन्हें अपनाएंगे।”
Priyank Kharge बोले- भूमि उपयोग बिल पर फिर होगी चर्चा
Priyank Kharge ने कहा कि विधेयक को भाजपा के विरोध-प्रदर्शन के कारण वापस नहीं लिया गया था और सरकार इसे चर्चा के लिए फिर से पेश करेगी।पब्लिक जगहों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े मुद्दे पर, खड़गे ने कहा कि यह मामला सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य का मुद्दा है जिस पर पब्लिक में चर्चा की ज़रूरत है।
पार्कों और दूसरी पब्लिक जगहों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि डेवलपमेंट की ज़रूरतों में सड़कें, फ्लाईओवर, हाईवे और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि इसका मकसद किसी बिल, स्कीम या पॉलिसी के असर का शुरुआती स्टेज में ही अंदाज़ा लगाना और लागू करने से पहले अच्छे सुझावों को शामिल करना है।
Priyank Kharge ने प्रस्तावित टनल रोड समेत इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ज़रूरत का भी बचाव किया और विपक्ष को चुनौती दी कि अगर वह टनल रोड या स्टील फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स का विरोध करता है तो वह दूसरे ऑप्शन बताए।
बेंगलुरु में टनल रोड की ज़रूरत पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बातों का ज़िक्र करते हुए,उन्होंने कहा, “हम बहस के लिए तैयार हैं। हम विचार-विमर्श के लिए तैयार हैं। अगर कोई गलती हुई है, तो हम उसे सुधारने के लिए भी तैयार हैं।”
GDP डेटा से जुड़े सवालों पर Priyank Kharge ने केंद्र में BJP की सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऊंचे बेस से शुरुआत की थी और इसलिए GDP ग्रोथ ज़्यादा दिख रही है, जबकि असल ग्रोथ लगभग 2.6 से 2.8 प्रतिशत थी।
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सरकार के आर्थिक डेटा पर उठाए सवाल
उन्होंने गरीबी और खरीदने की क्षमता (परचेजिंग पावर) के मामले में भारत की स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि जब सरकार का अपना आर्थिक सलाहकार ही ऐसे मुद्दे उठाता है, तो सिस्टम और डेटा से जुड़ी बातों की जांच करने की ज़रूरत है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और समाजवादी पार्टी व कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर खड़गे ने कहा कि इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ट्रस्ट में सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी का मतलब यह है कि संस्था भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त है, और कहा कि इस मामले पर जनता को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शी होना चाहिए और ट्रस्ट तथा सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर चर्चा के लिए तैयार रहना चाहिए। खरगे ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में भर्ती से जुड़े विवाद और आलोचनाओं पर भी जवाब दिया।
Priyank Kharge ने कहा कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग के पास नोटिफिकेशन जारी करने और वापस लेने का अधिकार है, और तर्क दिया कि भर्ती से जुड़े फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब यह मुद्दा शुरू में उठाया गया था, तब सरकार को संबंधित जांच रिपोर्ट नहीं मिली थी और रिपोर्ट फरवरी 2026 में ही प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि बाद में यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा और सरकार कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही थी।
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