Rahul Gandhi की ECI की आलोचना पर BJP के Aleti Maheshwar Reddy ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

रेड्डी ने कहा, "राहुल गांधी, जो हाथ में संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं और ऐसे बयान देते हैं जिनसे लोकतंत्र में आम आदमी का भरोसा कम हो; यह पूरी तरह से असंवैधानिक है।"

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अलेत्ती महेश्वर रेड्डी ने रविवार को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि Rahul Gandhi एक तरफ तो सार्वजनिक रूप से लोकतंत्र की रक्षा करने का दावा करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।

रेड्डी ने आरोप लगाया कि Rahul Gandhi लोकतंत्र और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) जैसी संवैधानिक संस्थाओं में आम आदमी का भरोसा कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

ECI विवाद पर Rahul Gandhi को BJP का जवाब

रेड्डी ने कहा, “Rahul Gandhi, जो हाथ में संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं और ऐसे बयान देते हैं जिनसे लोकतंत्र में आम आदमी का भरोसा कम हो; यह पूरी तरह से असंवैधानिक है।”

उन्होंने आगे पूछा कि Rahul Gandhi जो मुद्दे उठा रहे हैं, क्या वे उनकी अपनी चिंताएं हैं या ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की तरफ से हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक एकजुट विपक्ष के तौर पर काम न कर पाने की वजह से दूसरे गुट आगे आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “लेकिन आज आप दोनों के बीच एक तरह की ‘कोल्ड वॉर’ (अघोषित टकराव) चल रही है। चूंकि आप विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम रहे हैं, इसलिए CJP विकल्प बनने की कोशिश कर रही है। यह साफ दिख रहा है कि गैर-ज़रूरी मुद्दों का इस्तेमाल करके जनता का भरोसा तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं।”

उनकी ये बातें तब सामने आईं जब विपक्ष ने पिछले महीने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक मीडिया रिपोर्ट में बताई गई चुनावी गड़बड़ियों को लेकर ECI और केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की थी।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में EC के भीतर मतभेद का दावा

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान वोटर लिस्ट, वोटर रजिस्ट्रेशन और टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

ये आपत्तियां मुख्य रूप से ‘फॉर्म 6’ जमा करने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और सेंट्रल वोटर लिस्ट डेटाबेस तक पहुंच से जुड़ी थीं। बाद में, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने संस्थागत मतभेद के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि ड्राफ्ट तैयार होने के दौरान प्रशासनिक सवाल, कामकाज से जुड़े सुझाव और राय देना एक सामान्य प्रक्रिया है।

चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि SIR शेड्यूल से जुड़े सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।

यह राजनीतिक टकराव राष्ट्रीय राजधानी तक भी पहुंच गया, जहां यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के सदस्यों ने विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

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