CM Rekha Gupta ने Delhi में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर दिया जोर
इन हॉस्टलों में स्थानीय निकायों और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा चलाई जा रही सुविधाएं भी शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग जल्द ही विश्वास नगर और रोहिणी में कामकाजी महिलाओं के लिए रहने की अतिरिक्त सुविधाएं शुरू करेगा।

दिल्ली की CM Rekha Gupta ने शनिवार को कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान, मदद और भलाई दिल्ली सरकार की मुख्य प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने सुरक्षा को मजबूत करने और समय पर मदद सुनिश्चित करने के लिए कई उपायों का ज़िक्र किया।
CM Rekha Gupta के नेतृत्व में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए 11 वन स्टॉप सेंटर, 15 महिला आश्रय गृह, कामकाजी महिलाओं के लिए 14 हॉस्टल, इंटीग्रेटेड इमरजेंसी हेल्पलाइन, CCTV निगरानी और स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण जैसी कई अहम पहल की जा रही हैं।
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Rekha Gupta का महिला सुरक्षा पर जोर
Rekha Gupta ने आगे कहा कि सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी महिला या बच्चे को संकट के समय मदद पाने के लिए संघर्ष न करना पड़े और उन्हें सुरक्षा, काउंसलिंग, आश्रय, कानूनी मदद और पुनर्वास की सुविधा समय पर मिल सके।
इसे हासिल करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से लेकर परिवहन, लोक निर्माण, नगर निकायों और शिक्षण संस्थानों तक, अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
हेल्पलाइन और सहायता केंद्रों को जोड़ने के साथ-साथ, सरकार सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों, बेहतर लाइटिंग, CCTV निगरानी और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी ध्यान दे रही है।
Rekha Gupta ने कहा कि दिल्ली में महिलाओं की मदद के लिए 11 ‘वन स्टॉप सेंटर’ मौजूद हैं। ज़रूरत पड़ने पर सही तरीके से मदद मिल सके, इसके लिए महिला हेल्पलाइन 181 को इमरजेंसी हेल्पलाइन 112, वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, शक्ति सदन और प्रोटेक्शन ऑफिसर से जोड़ा गया है।
घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े मामलों में महिलाओं की मदद के लिए 20 प्रोटेक्शन ऑफिसर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण में मदद के लिए राज्य और ज़िला स्तर पर हब और सुविधा केंद्र भी मौजूद हैं।
Rekha Gupta ने यह भी बताया कि दिल्ली में महिलाओं के लिए 15 शेल्टर होम चल रहे हैं। कामकाजी महिलाओं की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, 14 कामकाजी महिला हॉस्टल उपलब्ध हैं, जिनमें कुल 2,427 लोगों के रहने की क्षमता है।
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महिला हॉस्टलों का होगा विस्तार
इन हॉस्टलों में स्थानीय निकायों और सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा चलाई जा रही सुविधाएं भी शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग जल्द ही विश्वास नगर और रोहिणी में कामकाजी महिलाओं के लिए रहने की अतिरिक्त सुविधाएं शुरू करेगा।
काम की जगह पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दर्ज करने और उनकी निगरानी के लिए इंटरनल कमिटी, लोकल कमिटी और SHE-Box पोर्टल के ज़रिए इंतज़ाम किए गए हैं। सरकार का मकसद यह पक्का करना है कि महिलाओं को शिकायत दर्ज करने से लेकर ज़रूरी मदद पाने तक, आसानी से सहायता मिल सके।
Rekha Gupta ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को सिर्फ़ सपोर्ट सेंटर तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता। सड़कों, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पार्कों और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित माहौल बनाना भी उतना ही ज़रूरी है।
इन कोशिशों के तहत, दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) में 2,947 बस मार्शल तैनात किए गए हैं और महिलाओं के लिए 56 स्पेशल बसें चल रही हैं। इनमें से 15 बसें शाम की शिफ्ट में चलती हैं, जिनमें शाम 5 बजे के बाद हथियारबंद महिला पुलिसकर्मी तैनात रहती हैं।
उन्होंने बताया कि सभी बसों को बस मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जोड़ा गया है। कंट्रोल सेंटर के ज़रिए पैनिक अलार्म, लाइव CCTV फ़ीड और GPS की 24 घंटे निगरानी की जाती है।
साथ ही, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के तहत सड़कों पर 96,000 स्ट्रीटलाइटें लगाई गई हैं, जिनमें 45,000 HPSV लाइटें और 51,000 LED लाइटें शामिल हैं। विभाग के तहत कुल 2,53,983 CCTV कैमरे काम कर रहे हैं।
नागरिक टोल-फ़्री नंबर 1908 और PWD सेवा पोर्टल के ज़रिए भी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के साथ-साथ उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना और उन्हें आत्मविश्वास से भरपूर बनाना भी ज़रूरी है।
दिल्ली में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को इमरजेंसी हेल्पलाइन 112, चाइल्ड केयर संस्थानों और ज़िला बाल संरक्षण इकाइयों से जोड़ा गया है।
शहर में सरकार द्वारा चलाए जा रहे 30 और गैर-सरकारी 56 चाइल्ड केयर संस्थान हैं।
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बच्चों की सुरक्षा के लिए नई पहल
इसके अलावा, लड़कों और लड़कियों के लिए एक-एक ‘आफ़्टर-केयर होम’ भी उपलब्ध है। ज़रूरतमंद बच्चों को मदद, सुरक्षा और पुनर्वास से जोड़ने के लिए ग्यारह ज़िला बाल संरक्षण इकाइयाँ काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समितियाँ और किशोर न्याय बोर्ड बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए वैधानिक निकायों के तौर पर काम कर रहे हैं। बाल विवाह को रोकने के लिए सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेटों को बाल विवाह निषेध अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया गया है।
बच्चों की सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए स्कूलों में लगभग 1.5 लाख CCTV कैमरे लगाए गए हैं। ‘रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम’ के तहत 1,397 स्कूलों में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
Rekha Gupta ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण, बेटियों का सम्मान और हर नागरिक के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने का संकल्प देश की विकास यात्रा के अहम स्तंभ हैं।
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार ऐसे सिस्टम को मजबूत कर रही है जिससे संकट के समय महिलाओं को तुरंत मदद मिल सके, कामकाजी महिलाओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों और हर बच्चे को सुरक्षित माहौल में सीखने, आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने का मौका मिले।
Rekha Gupta ने कहा कि मकसद सिर्फ सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि जरूरत पड़ने पर वे ठीक से काम करें। दिल्ली में महिला-बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहतर तालमेल, नियमित निगरानी और शिकायतों का समय पर निपटारा जरूरी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और सार्वजनिक स्थानों को भयमुक्त बनाना एक मजबूत, संवेदनशील और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में बेहद अहम कदम है।
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