चुनावी विवाद के बीच Akhilesh Yadav ने CEC के इस्तीफ़े की मांग की।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के नेतृत्व में फ़ैसले लेने के तरीक़े को लेकर चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक रूप से लिखित असहमति जताई।

(SP) प्रमुख Akhilesh Yadav ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफ़े की मांग की और कहा कि जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
पत्रकारों से बात करते हुए Akhilesh Yadav ने कहा कि विपक्ष और लोकतंत्र की रक्षा करने वाले लोग CEC के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव “छीन लिया गया” है। Akhilesh Yadav ने गुरुवार को कहा, “जिन लोगों ने चुनाव आयोग में ये मतभेद पैदा किए, उन्हें खुद ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
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इंडियन एक्सप्रेस की जांच के बाद बढ़ा राजनीतिक बवाल
पूरा विपक्ष और लोकतंत्र को बचाने की चाहत रखने वाले सभी लोग यह मांग कर रहे हैं कि जब ऐसे आरोप लगे हैं, तो CEC को खुद इस्तीफ़ा देकर हट जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव हथिया लिया।”
SP प्रमुख की यह टिप्पणी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक जांच के बाद मचे राजनीतिक बवाल के बीच आई है। इस जांच में पता चला था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बार-बार उन प्रक्रियागत बदलावों पर सवाल उठाए थे, जिन्हें कथित तौर पर पूरे आयोग की मंज़ूरी के बिना लागू किया गया था।
बताए गए बदलावों में ERONET वोटर लिस्ट डेटाबेस का सेंट्रलाइज़ेशन, नए वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म (फ़ॉर्म 6) में बदलाव और स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े फ़ैसले शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के नेतृत्व में फ़ैसले लेने के तरीक़े को लेकर चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक रूप से लिखित असहमति जताई।
मुख्य मुद्दों में ERONET वोटर लिस्ट डेटाबेस प्लेटफ़ॉर्म का तेज़ी से सेंट्रलाइज़ेशन, नए वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म (फ़ॉर्म 6) में एकतरफ़ा बदलाव और स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े फ़ैसले शामिल हैं।
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Akhilesh Yadav के सवालों पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
चुनाव आयोग ने साफ़ किया कि कई सदस्यों वाली संस्था में अंदरूनी तकनीकी नोट और लिखित सवाल एक सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने भरोसा दिलाया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें पूरी कानूनी मंज़ूरी हासिल है।
ECI का कहना है कि आयोग के सभी अंतिम फ़ैसले – जिनमें SIR प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसले भी शामिल हैं – सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें तीनों आयुक्तों की मंज़ूरी मिली हुई थी।
जहाँ एक तरफ़ BJP और ECI, SIR प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता का बचाव कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने जवाबदेही और मतदाता सूची में बदलावों की गहन समीक्षा की अपनी माँग को और तेज़ कर दिया है।
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