सत्ता परिवर्तन विवाद पर CM Fadnavis ने Congress पर साधा निशाना
केशवन ने लिखा, "जब राहुल गांधी 'रेजीम चेंज' और खून-खराबे वाली क्रांति के लिए प्रशांत भूषण के अराजक आह्वान की निंदा करने के बजाय उनके साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, तो यह राहुल गांधी की लोकतंत्र-विरोधी, आपातकाल जैसी मानसिकता को दर्शाता है।

महाराष्ट्र के CM Fadnavis ने शनिवार को विपक्ष पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर जाकर केंद्र सरकार को “गिराने” की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का विरोध करना असल में “सत्ता परिवर्तन” (regime change) की एक चाल है।
X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में CM Fadnavis ने कहा, “चूंकि लोकतांत्रिक तरीके से पात्र मतदाताओं के वोट पाकर उनके जीतने की कोई दूर-दूर तक संभावना नहीं है, इसलिए आखिरकार ‘सच’ सामने आ ही गया। देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने की उनकी साजिश का पर्दाफाश हो गया है!”
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SIR विरोध पर CM Fadnavis का हमला
SIR पर विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए CM Fadnavis ने कहा, “वे ‘SIR’ का विरोध क्यों कर रहे हैं? क्योंकि वे ‘सत्ता परिवर्तन’ चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “चूंकि उनके पास चुनाव के जरिए सत्ता में आने का कोई मौका नहीं है, इसलिए वे ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) की बात करते हैं!”
CM Fadnavis ने कहा, “वे सरकार को गिराना चाहते हैं—लेकिन लोकतांत्रिक तरीकों से नहीं!… ‘SIR’ (मुख्य चुनाव आयुक्त) का विरोध तो बस एक बहाना है; असल विरोध तो लोकतंत्र के खिलाफ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ‘SIR’ के खिलाफ विपक्ष का अभियान असल में लोकतंत्र को निशाना बना रहा है।
उन्होंने आगे कहा, “असली विरोध आपके और मेरे वोट के खिलाफ है—यानी उन नागरिकों के वोट के खिलाफ, जिन्हें वोट देने का अधिकार है।”CM Fadnavis ने लोगों से यह तय करने को कहा कि वे लोकतंत्र का समर्थन करते हैं या फिर उन लोगों का, जो ‘सत्ता परिवर्तन’ की वकालत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अब हमें तय करना होगा: क्या हमें लोकतंत्र चाहिए, या फिर वे लोग चाहिए जो ‘सत्ता परिवर्तन’ की बात करते हैं? लोकतंत्र को बचाने के लिए ‘SIR’ (मुख्य चुनाव आयुक्त) के अलावा कोई और विकल्प नहीं है!”
उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब एक विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को “सत्ता परिवर्तन की लड़ाई” करार दिया, जबकि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश में ‘जेन जेड’ (Gen Z) आंदोलन का जिक्र किया।
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बीजेपी ने इन बयानों को इस बात का सबूत माना है कि मोदी सरकार को चुनावी प्रक्रिया के बाहर जाकर गिराने की कोशिश की जा रही है, हालांकि विपक्ष ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को “सत्ता परिवर्तन” शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा कि लोकतंत्र में यह एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है।
उन्होंने सवाल किया कि लोकतंत्र में इस शब्द के इस्तेमाल पर सत्ताधारी पार्टी “दिखावटी गुस्सा” क्यों दिखा रही है। X पर एक पोस्ट में चिदंबरम ने कहा, “‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) शब्द के इस्तेमाल पर बीजेपी इतना दिखावटी गुस्सा क्यों दिखा रही है? लोकतंत्र में ‘रेजीम चेंज’ होना एक सामान्य बात है।”
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम द्वारा ‘रेजीम चेंज’ शब्द के बचाव का जवाब देते हुए, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने राहुल गांधी पर “लोकतंत्र-विरोधी, आपातकाल जैसी मानसिकता” रखने और “मॉबोक्रेसी” (भीड़तंत्र) का समर्थन करने का आरोप लगाया।
X पर, केशवन ने राहुल गांधी की आलोचना की कि उन्होंने ऐसे लोगों के साथ मंच साझा किया जो असंवैधानिक तरीकों और सड़क पर हंगामे की वकालत करते हैं, जबकि उन्हें ऐसे विचारों से खुद को दूर रखना चाहिए था।
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केशवन ने लिखा, “जब राहुल गांधी ‘रेजीम चेंज’ और खून-खराबे वाली क्रांति के लिए प्रशांत भूषण के अराजक आह्वान की निंदा करने के बजाय उनके साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, तो यह राहुल गांधी की लोकतंत्र-विरोधी, आपातकाल जैसी मानसिकता को दर्शाता है।
जब राहुल गांधी बांग्लादेश में ‘रेजीम चेंज’ का महिमामंडन करने वाली नेहा बोरा की भड़काऊ बातों की निंदा करने के बजाय, उनके साथ खुशी-खुशी सार्वजनिक मंच साझा करते हैं, तो यह ‘मॉबोक्रेसी’ (भीड़तंत्र) की राजनीति के प्रति उनके समर्थन को दिखाता है।”
इससे पहले शुक्रवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) के खिलाफ युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वे बांग्लादेश की तर्ज पर ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) चाहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष युवाओं को “अराजकता की राजनीति में मोहरा” बनाकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
सिंह ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो कुछ हुआ है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी – सीधे तौर पर और अपने संबद्ध संगठनों के माध्यम से – युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र-निर्माण में लगाने के बजाय, राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के काम में लगा रहे हैं।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को ‘सत्ता परिवर्तन’ (regime change) से जोड़ने वाली टिप्पणियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
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