BJP की नई Social Media Team पर Pawan Khera का बड़ा आरोप

ये टिप्पणियां राजनीतिक बातचीत में "नक्सल" और "राष्ट्र-विरोधी" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर फिर से शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा था

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को BJP पर देश के युवाओं को हिंसा की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने BJP कर्नाटक के सोशल मीडिया पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें पार्टी का ‘दिमागी नक्सल’ वाला वीडियो था।

X पर एक पोस्ट में खेड़ा ने लिखा, “आखिरकार असली चेहरा सामने आ रहा है।”उन्होंने कहा, “बीजेपी ने एक नई सोशल मीडिया टीम बनाई क्योंकि पुरानी टीम की भद्दी भाषा और घटिया हथकंडे साफ़ तौर पर काफ़ी नहीं थे।

अब वे खुलेआम युवाओं को हिंसा की धमकी देने लगे हैं। आख़िरकार उनका असली चेहरा सामने आ रहा है।”कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस पोस्ट को लेकर बीजेपी की आलोचना की और आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी देश के युवाओं को धमका रही है।

BJP पर गंभीर आरोप

X पर एक पोस्ट में दास ने लिखा, “सत्ताधारी पार्टी खुलेआम देश के युवाओं को गोली मारने की धमकी दे रही है! यह सरासर बुराई है। लगता है वे अपना आपा खो बैठे हैं!”

एक और पोस्ट में दास ने कहा कि जिसे वे “दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी” कहते हैं, उसे नफ़रत में डूबा देखकर उन्हें “दुख” हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पार्टी “एक ऐसी पीढ़ी के सामूहिक नरसंहार” का आह्वान कर रही है जो सरकार से सवाल करती है और बेहतर व्यवस्था की मांग करती है।

दास ने आगे कहा, “सच कहूँ तो, ‘दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी’ को इतनी नफ़रत में डूबा हुआ देखकर दुख होता है कि उन्हें उस पीढ़ी के ‘सामूहिक नरसंहार’ की बात करने में कोई बुराई नहीं लगती,

जो सरकार से सवाल पूछने और बस एक बेहतर सिस्टम और अपने लिए उज्ज्वल भविष्य की मांग करने में विश्वास रखती है।” नाज़ी जर्मनी से तुलना करते हुए दास ने कहा, “हिटलर ने नाज़ी जर्मनी में यहूदियों के साथ बिल्कुल यही किया था।

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दास का BJP की विचारधारा पर सवाल

हम यहाँ तक कैसे पहुँच गए? हमें यह पोस्ट करना ‘सामान्य’ कैसे लगा? ये लोग संविधान में विश्वास नहीं करते। वे सच में एक-दूसरे के विचारों और राय के प्रति सम्मान और सहनशीलता की भावना में विश्वास नहीं करते।

वे सच में यह नहीं मानते कि लोकतंत्र तभी टिकता है जब चुने हुए लोगों से जवाब माँगा जाए। यह सच में भारत का वह विचार नहीं है जिसमें हमारे गांधी और अंबेडकर विश्वास करते थे।

यह दुखद है। यह बेहद घिनौना है। मुझे उम्मीद है कि हम इस बदसूरती से बाहर निकल पाएँगे जिसने हमारे खूबसूरत देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हमें बहुत संघर्ष के बाद आज़ादी मिली थी।

और इसलिए हमें कभी भी ऐसे घटिया लोगों को इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी वाले पदों पर नहीं रहने देना चाहिए। सच में बहुत घिन आ रही है।”ये आरोप तब लगे हैं जब कर्नाटक BJP ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसकी विपक्षी नेताओं ने आलोचना की।

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‘नक्सल’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ शब्दों पर विवाद

ये टिप्पणियां राजनीतिक बातचीत में “नक्सल” और “राष्ट्र-विरोधी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर फिर से शुरू हुई राजनीतिक बहस के बीच आई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा था

कि हालांकि जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सलियों को खत्म कर दिया गया है,लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ भी हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं और जिनकी “पहचान करके उन्हें अलग-थलग” करने की ज़रूरत है।

“सालों तक माओवादी सोच वाले लोग सार्वजनिक जीवन में मौजूद रहे; सरकारी कमेटियों में भी इस सोच ने कई संस्थानों और पहलों को प्रभावित किया।

मेरे प्यारे देशवासियों, हम ‘हथियारबंद नक्सल’ पर लगाम लगाने और देश को उनसे मुक्त करने में सफल रहे हैं। भले ही ये नक्सल खत्म हो गए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ (नक्सली सोच वाले लोग) मौके की तलाश में हैं,

हिंसा के रास्ते खोज रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों की पहचान करनी होगी, उन्हें अलग-थलग करना होगा और एक विकसित देश के लिए युवाओं को एकजुट करना होगा,” पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा।

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