INDIA गठबंधन की रैली पर JP Nadda का Rahul Gandhi  पर निशाना

अभी त्योहारों का मौसम चल रहा है—धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा।" "पूरे साल हमारे छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और दुकानदार इस समय का इंतज़ार करते हैं, इस उम्मीद में कि वे इतना कमा सकें जिससे उनके परिवार का गुज़ारा हो सके और बच्चों की ज़रूरतें पूरी हो सकें।

रविवार, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के ‘चलो दिल्ली’ मार्च के जवाब में, केंद्रीय मंत्री JP Nadda ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।

JP Nadda ने इस रैली को – जो मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के विरोध में और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए आयोजित की गई थी – बार-बार जनता द्वारा नकारे गए दलों का एक “सुनियोजित ड्रामा” करार दिया।

JP Nadda ने विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

JP Nadda ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के पीछे चार चरणों वाले एक “अराजकता मॉडल” का जिक्र किया। पहला चरण चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर झूठी बातें और अफवाहें फैलाना है। दूसरा चरण सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करना है, जिसका मकसद राजधानी में प्रशासनिक कामकाज को ठप करना है।

उन्होंने कहा कि तीसरा चरण बाजारों को बंद कराकर और सप्लाई चेन को रोककर आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है। वहीं, JP Nadda का आरोप है कि चौथा चरण सत्ता परिवर्तन का एक एजेंडा है, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय ताकतों के साथ मिलकर एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना है।

उन्होंने कहा, “आज रामलीला मैदान में जो हो रहा है, वह लोकतंत्र के प्रति सम्मान नहीं है; बल्कि यह लोकतंत्र के नाम पर देश को अराजकता में धकेलने की एक सोची-समझी साजिश है। यह उन लोगों द्वारा रचा गया एक मूर्खतापूर्ण और सुनियोजित ड्रामा है, जिन्हें जनता ने बार-बार हराया और नकारा है—और यह बात जनता अच्छी तरह समझती है।

राहुल गांधी, मैं आज देश को बताना चाहता हूं कि आपकी राजनीति का मॉडल क्या है: पहला चरण झूठ और अफवाहें फैलाना है; दूसरा सड़कों पर अराजकता और अफरा-तफरी पैदा करना है; तीसरा देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है; और चौथा विदेशी ताकतों के इशारे पर एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करना है।”

JP Nadda ने आरोप लगाया कि 1 नवंबर का यह प्रदर्शन विदेशी ताकतों द्वारा उकसाया गया एक कदम था, जिसका मकसद सामाजिक अशांति फैलाना और त्योहारी सीजन के दौरान व्यापारियों के कामकाज में बाधा डालना था।

उन्होंने विशेष रूप से 1 नवंबर की ऐतिहासिक संवेदनशीलता का भी जिक्र किया, जो 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी का दिन है। इसे लोकतांत्रिक इतिहास के “सबसे काले धब्बों” में से एक बताते हुए, नड्डा ने रामलीला मैदान में राजनीतिक रैली के लिए इसी दिन को चुनने पर कांग्रेस की कड़ी आलोचना की और इसे सिख समुदाय के प्रति असंवेदनशील कदम करार दिया।

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रैली को लेकर JP Nadda के गंभीर आरोप

JP Nadda ने आगे कहा, “1 नवंबर को राहुल गांधी द्वारा रचे गए इस ड्रामे के चार उद्देश्य हैं: पहला, हमारे सिख भाइयों के जख्मों पर नमक छिड़कना; दूसरा, दिल्ली में दंगे और अफरा-तफरी फैलाकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराना; तीसरा, त्योहारों के इस मौसम में दिल्ली के दुकानदारों और व्यापारियों की कमाई छीनना; और चौथा, देश को बदनाम करना।”

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस हिंसा के लिए सिख समुदाय से सच्चे दिल से माफी मांगने में नाकाम रही है। नड्डा ने कहा, “राहुल गांधी, ध्यान से सुनिए: यह भारत है, कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ (कमजोर या अस्थिर देश) नहीं, जहां आप जब चाहें आगजनी करवा सकें, दंगे भड़का सकें या ‘सत्ता परिवर्तन’ का अपना एजेंडा चला सकें। सपने देखना बंद कीजिए, राहुल गांधी।

भारत दुनिया का सबसे पुराना और सबसे मजबूत लोकतंत्र है।” उन्होंने आगे कहा, “1 नवंबर का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे कुख्यात और काला अध्याय है। इसी दिन, कांग्रेस पार्टी द्वारा पाले-पोसे गए गुंडों ने हमारे निर्दोष सिख भाइयों का कत्लेआम किया था।

रातों-रात हजारों सिख परिवार बेघर हो गए और हजारों महिलाएं विधवा हो गईं। देश इस बात को भूला नहीं है; आज भी दिल्ली की ‘विडो कॉलोनी’ (विधवा कॉलोनी) कांग्रेस के इतिहास के उस भयानक और खूनी अध्याय की गवाह है। आज तक, गांधी परिवार ने उस गंभीर पाप के लिए सिख समुदाय से सच्चे दिल से माफी नहीं मांगी है।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस की संवेदनहीनता और राहुल गांधी की ओछी मानसिकता को देखिए। इस काले दिन पर, जब देश को अपने शहीदों और पीड़ितों को याद करना चाहिए था, राहुल गांधी रामलीला मैदान में खड़े होकर केवल अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने में लगे हैं।”

JP Nadda ने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का मकसद त्योहारों के इस पवित्र मौसम में दिल्ली को ठप करना, हमारे छोटे दुकानदारों और व्यापारियों की रोजी-रोटी पर चोट करना, और देश में अशांति व अफरा-तफरी का माहौल पैदा करना है।

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त्योहारों में व्यापारियों की चिंता

अभी त्योहारों का मौसम चल रहा है—धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा।” “पूरे साल हमारे छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और दुकानदार इस समय का इंतज़ार करते हैं, इस उम्मीद में कि वे इतना कमा सकें जिससे उनके परिवार का गुज़ारा हो सके और बच्चों की ज़रूरतें पूरी हो सकें।

लेकिन, राहुल गांधी को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि इन व्यापारियों के घरों का चूल्हा जलता रहेगा या नहीं; उन्हें बस अपनी राजनीति चमकाने में दिलचस्पी है। ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से बार-बार – आज समेत कुल तीन बार – संपर्क किया है।

उन्होंने गुहार लगाई, ‘भगवान के लिए, त्योहारों के इस मौसम में दिल्ली में इतनी भारी भीड़ न जुटाएं; हमारे कारोबार को ठप न करें।’ फिर भी, राहुल गांधी की ज़िद के कारण आज उनका कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है,” उन्होंने आगे कहा।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की रैली हो रही है। यह रैली मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के खिलाफ विपक्ष के अभियान और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के तहत आयोजित की गई है।

इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। लगभग 10,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है, जिनमें से 4,000 से ज़्यादा जवान रामलीला मैदान और उसके आस-पास मौजूद हैं।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) की धारा 163 के तहत पाबंदियां भी लागू की गई हैं, और निगरानी के लिए CCTV कैमरों, AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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