Priyanka Gandhi ने EC के लिए कानूनी सुरक्षा हटाने की मांग की।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। अगर चुनाव आयोग चुनाव में धांधली करने में BJP की मदद कर रहा है, तो ज़ाहिर है कि वे इसे सही ठहराने की कोशिश करेंगे।

शनिवार को Priyanka Gandhi ने चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा को हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सुरक्षा उपाय “इसी सरकार ने लागू किए थे।”

मलप्पुरम में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा, जिसे इसी सरकार ने लागू किया था, उन्हें हर हाल में बचाती है, चाहे वे कुछ भी करें।

अगर कोई देश के खिलाफ गैर-कानूनी काम कर रहा है, तो उन सुरक्षा उपायों को हटाना ज़रूरी है; और जिन आपराधिक कामों में वे शामिल हैं, उनके लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।”

Priyanka Gandhi का आरोप- EC BJP की मदद कर रहा है

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। अगर चुनाव आयोग चुनाव में धांधली करने में BJP की मदद कर रहा है, तो ज़ाहिर है कि वे इसे सही ठहराने की कोशिश करेंगे।

आपने हर चुनाव से पहले उनके बहुत ज़्यादा आत्मविश्वास वाले बयान देखे होंगे, जिनमें वे ठीक-ठीक बताते हैं कि उन्हें कितनी सीटें मिलेंगी… भारत के लोग उनसे इतने खुश नहीं हैं… तो ज़मीन पर लोगों से जो सुनने को मिलता है, वह कुछ और है और चुनाव के नतीजों में जो दिखता है, वह कुछ और? राहुल गांधी ने तुरंत यह मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए… INDIA गठबंधन का रुख़ बिल्कुल साफ़ है।

गठबंधन का हर नेता, हर पार्टी पूरी तरह सहमत है कि जो हो रहा है, वह पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी है… जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उनसे जवाब-तलब किया जाना चाहिए; उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए,” वाड्रा ने आगे कहा।

Priyanka Gandhi की यह टिप्पणी चुनाव आयोग की बढ़ती आलोचना के बीच आई है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसलों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अपनी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर कई बार आपत्ति जताई थी।

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SIR प्रक्रिया पर ECI का बड़ा बयान

भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के शेड्यूल से जुड़े सभी फैसले “आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी” से लिए गए थे।

EC ने आगे कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजा गया पत्र डेप्युटेशन पर काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि चुनाव आयोग के किसी नीतिगत मामले से।

बैठक के बाद जारी अपने प्रेस नोट में, ECI ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के लिए शेड्यूल 27 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया था, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शेड्यूल 14 मई, 2026 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि 24 जून, 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी SIR का आदेश – जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और उसके बाद पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया गया – आयोग द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था।

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