PM Modi ने ‘Make in India’ के 12 साल पूरे होने पर तारीफ़ की, कहा – इस पहल ने भारत को बदल दिया है।
इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने मुख्य रूप से अपने घरेलू बाज़ार के लिए सामान बनाने की सोच से आगे बढ़कर, ग्लोबल बाज़ार के लिए सामान बनाने में सक्षम देश बनने का सफ़र तय किया है।

PM Modi ने शुक्रवार को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 12 साल पूरे होने पर अलग-अलग सेक्टर में आए बदलावों पर ज़ोर दिया। X पर एक पोस्ट में, पीएम मोदी ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और एक्सपोर्ट में हुई बढ़ोतरी का ज़िक्र करते हुए कहा, “भारत में ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग।
भारत में ज़्यादा निवेश। भारत से ज़्यादा एक्सपोर्ट। हर सेक्टर में बदलाव साफ़ दिख रहा है! #12YearsOfMakeInIndia।” ‘मेक इन इंडिया’ पहल 25 सितंबर, 2014 को शुरू की गई थी।
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PM Modi ने एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को सराहा
इसका मकसद भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करना और देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिज़ाइन और इनोवेशन के लिए एक ग्लोबल हब बनाना था।
इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने मुख्य रूप से अपने घरेलू बाज़ार के लिए सामान बनाने की सोच से आगे बढ़कर, ग्लोबल बाज़ार के लिए सामान बनाने में सक्षम देश बनने का सफ़र तय किया है।
गोयल ने कहा, ” ‘मेक इन इंडिया’ की असली कहानी इन आंकड़ों से कहीं आगे की है। यह उस भरोसे की कहानी है जो इससे पैदा हुआ है। यह भरोसा हमारे स्टार्टअप फ़ाउंडर्स, उद्यमियों, मैन्युफ़ैक्चरर्स, इनोवेटर्स, एक्सपोर्टर्स और सबसे ज़रूरी, हमारे लोगों के बीच है कि ‘भारत बना सकता है, भारत इनोवेशन कर सकता है और भारत दुनिया के साथ मुक़ाबला कर सकता है’।”
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हाल के वर्षों में मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जबकि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीमों ने निवेश, प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट को बढ़ाने में योगदान दिया है।
31 मार्च 2026 तक, PLI स्कीमों के तहत लगभग 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ और लगभग 23.8 लाख करोड़ रुपये का प्रोडक्शन और बिक्री हुई।
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12 साल में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को मिली नई रफ्तार
साथ ही, लगभग 15.2 लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हुआ और 14.6 लाख से ज़्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हुईं। पिछले 12 सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का भी काफ़ी विस्तार हुआ है।
इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रोडक्शन 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि मोबाइल फ़ोन का प्रोडक्शन लगभग 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।
सरकार का कहना है कि इस पहल से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं मज़बूत हुई हैं और साथ ही निवेश, इनोवेशन और ग्लोबल सप्लाई चेन के साथ जुड़ाव को बढ़ावा मिला है।
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