इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Rahul Gandhi के खिलाफ याचिका की खारिज

ACJM नीरज त्रिपाठी ने फिर से इस मामले को खारिज कर दिया, क्योंकि कथित घटना की तारीख और समय का उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने ACJM-V कोर्ट में एक और रिवीजन याचिका दायर की।

Rahul Gandhi के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें सिख समुदाय के बारे में कथित विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों द्वारा दायर उस याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर की गई थी।

वाराणसी कोर्ट में खारिज हुई अर्जी

याचिकाकर्ता वाराणसी की एक अदालत द्वारा FIR दर्ज करने की उनकी अर्जी खारिज किए जाने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी पेश हुए, जबकि राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल मौजूद रहे। यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर की गई है, जिसमें Rahul Gandhi के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

वाराणसी की एक अदालत द्वारा FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी खारिज किए जाने के बाद, याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

यह याचिका वाराणसी के रहने वाले नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों ने तब दायर की, जब सारनाथ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराने की उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वे अदालत पहुंचे।

28 नवंबर 2024 को, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM-II) ने यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया था कि कथित टिप्पणी संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई थी, जो अदालत के अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिसडिक्शन) से बाहर है।

इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने MP/MLA कोर्ट में एक रिवीजन याचिका दायर की, जिसे 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया गया। राहुल गांधी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद वाराणसी की ACJM-IV अदालत में इस मामले की फिर से सुनवाई हुई।

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FIR की अर्जी दूसरी बार खारिज

ACJM नीरज त्रिपाठी ने फिर से इस मामले को खारिज कर दिया, क्योंकि कथित घटना की तारीख और समय का उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने ACJM-V कोर्ट में एक और रिवीजन याचिका दायर की।

Rahul Gandhi ने 25 अगस्त को MP/MLA कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल किया। उन्होंने कहा कि नागेश्वर मिश्रा द्वारा दायर की गई रिवीजन याचिका राजनीतिक रूप से प्रेरित है और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

खुद को “सच्चा देशभक्त” बताते हुए, गांधी ने कहा कि वे सभी धर्मों और समुदायों का गहरा सम्मान करते हैं, जिसमें सिख समुदाय भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य सिखों के हितों और उनके योगदान को उजागर करना था।

2024 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान, Rahul Gandhi ने कहा था कि मुख्य मुद्दा यह है कि क्या भारत में किसी सिख को पगड़ी और ‘कड़ा’ पहनने का अधिकार है। इस बयान के जवाब में नागेश्वर मिश्रा ने एक याचिका दायर की।

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Rahul Gandhi का सिखों पर बयान

10 सितंबर 2024 को अमेरिका में, Rahul Gandhi ने कहा कि भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि क्या उन्हें अपनी पगड़ी और ‘कड़ा’ पहनने की अनुमति मिलेगी, और क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह चिंता केवल सिख समुदाय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों से जुड़ी है।

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी यह नहीं मानती कि यह देश सभी का है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक ‘संघ’ (यूनियन) है—एक ऐसी अवधारणा जिसे संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है—जिसमें अलग-अलग इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शैलियां शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, ‘संघ’ की इस अवधारणा को ही नकारती है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस भारत को नहीं समझता। आरएसएस का मानना ​​है कि कुछ राज्य दूसरों की तुलना में कमतर हैं। उनका नजरिया यह है कि कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से, और कुछ समुदाय दूसरे समुदायों से कमतर हैं।

जबकि, हर राज्य का अपना एक अलग इतिहास और परंपराएं हैं। आरएसएस की सोच में, तमिल, मराठी, बंगाली और मणिपुरी जैसी भाषाओं को कमतर माना जाता है। यही इस विवाद की जड़ है। आरएसएस भारत को नहीं समझता।

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