Amit Shah ने ज्ञान और विचारधारा को लेकर मुंबई में दिया अहम बयान
Amit Shah ने कहा, "जो देश अपनी यादों, इतिहास, मूल्यों, भाषा, रिकॉर्ड और परंपराओं की रक्षा नहीं कर सकता—चाहे वह कितना भी ताकतवर क्यों न हो—उसे खत्म होने में ज़्यादा समय नहीं लगता।"

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने रविवार को कहा कि “सच्चा ज्ञान कभी किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता” और उन्होंने एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ मुंबई के पास मौजूद ज्ञान के विशाल भंडार और संग्रह का इस्तेमाल देश और दुनिया की भलाई के लिए करने का आह्वान किया।
एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ मुंबई में ‘गणेश ज्ञानार्थी’ प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए Amit Shah ने कहा कि ज्ञान को वैचारिक बंधनों से मुक्त रहना चाहिए और उसे बिना किसी रोक-टोक के विकसित होने देना चाहिए।
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ज्ञान अपने आप में एक विचारधारा
Amit Shah ने कहा, “सच्चा ज्ञान कभी किसी विचारधारा का बंधक नहीं होता। ज्ञान अपने आप में एक विचारधारा है। अगर आप इसे किसी भी तरह से बांधते हैं, तो आप ज्ञान का मूल अर्थ ही बदल देते हैं।
ज्ञान मुक्त और बेरोकटोक होना चाहिए, और उसका प्रसार भी मुक्त और बेरोकटोक होना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि संस्थान में मौजूद ज्ञान, संपत्ति और संग्रह का इस्तेमाल करके एक “महान भारत” बनाने में कैसे योगदान दिया जाए।
उन्होंने कहा, “इस बात पर चर्चा करने के बजाय कि एशियाटिक सोसाइटी क्यों बनी, किसने बनाई और किस मकसद से बनाई, हमें इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए कि यहां जमा संपत्ति, ज्ञान और संग्रह का इस्तेमाल ‘महान भारत’ बनाने में कैसे किया जा सकता है।”
Amit Shah ने कहा कि नालंदा का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत की ज्ञान परंपरा इसे खत्म करने की बार-बार की गई कोशिशों के बावजूद बची रही।
उन्होंने कहा, “कोई नालंदा की लाइब्रेरी को जला सकता है, जहां महीनों तक इतनी तेज़ी से धुआं उठता रहा, लेकिन लोगों के मन में याद और परंपरा (स्मृति और श्रुति) के तौर पर जो ज्ञान बसा है—उस ज्ञान को कोई खत्म नहीं कर सकता।”
उन्होंने कहा कि जो देश अपने इतिहास, यादों, मूल्यों, भाषाओं, रिकॉर्ड और परंपराओं को बचाकर रखते हैं, उन्हें आसानी से गुलाम नहीं बनाया जा सकता।
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Amit Shah ने देश की विरासत पर जोर दिया
Amit Shah ने कहा, “जो देश अपनी यादों, इतिहास, मूल्यों, भाषा, रिकॉर्ड और परंपराओं की रक्षा नहीं कर सकता—चाहे वह कितना भी ताकतवर क्यों न हो—उसे खत्म होने में ज़्यादा समय नहीं लगता।”
उन्होंने ‘इंडोलॉजी’ के नज़रिए से भारतीय ज्ञान की औपनिवेशिक व्याख्या की भी आलोचना की और कहा कि शुरुआत में भारतीय बौद्धिक परंपराओं का अध्ययन औपनिवेशिक नज़रिए से किया गया था।
उन्होंने कहा, “भारत का ज्ञान भारत की आवाज़ में नहीं लिखा जा रहा था। भारत का ज्ञान औपनिवेशिक नज़रिए वाली भाषा में लिखा जा रहा था।” शाह के अनुसार, इस तरह के नज़रिए का मकसद लोगों का आत्मविश्वास कम करना और समाज में हीन भावना पैदा करना था।
उन्होंने भरोसा जताया कि एशियाटिक सोसाइटी, अपनी नई लीडरशिप के तहत, देश भर में भारत की ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने और उसे फैलाने में मदद करेगी।
Amit Shah ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में एशियाटिक सोसाइटी मुंबई भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने और इसे पूरे देश में फैलाने का काम करेगी।” शाह ने यह भी कहा कि संस्थान द्वारा सुरक्षित रखा गया ज्ञान आखिरकार देश, दुनिया और मानवता की भलाई के काम आना चाहिए।
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