BRICS से पहले Rupee पर Priyank Kharge का निशाना

खरगे ने वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर भी बीजेपी की आलोचना की और सवाल उठाया कि राष्ट्रीय गीत को कैसे गाया जाना चाहिए, यह तय करने का अधिकार पार्टी को किसने दिया है।

शुक्रवार को मंत्री Priyank Kharge ने ब्रिक्स समिट से पहले केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय रुपये को लेकर किए गए अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और चीन से जुड़ी चुनौतियों का ठीक से सामना नहीं कर पाई है।

Priyank Kharge ने कहा कि सरकार की विदेश नीति पटरी से उतरी हुई लग रही है और उन्होंने भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए। Priyank Kharge ने कहा, “एक दशक से ज़्यादा समय हो गया है, विदेश नीति पूरी तरह से गड़बड़ा गई है।

अगर आप देखें, तो चाहे सस्ते रूसी तेल की खरीद का मामला हो, अमेरिका आप पर दबाव बनाता है और आप पीछे हट जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, आप चीनी प्रीमियर से मेल-जोल बढ़ाते हैं और वे अरुणाचल प्रदेश पर कब्ज़ा कर लेते हैं।

Chinese Apps पर Centre की नीति पर सवाल

एक तरफ आप चीनी ऐप्स और चीनी सामान पर बैन लगाते हैं, और फिर पीछे हट जाते हैं। इसलिए, मुझे यकीन नहीं है कि विदेश नीति सही रास्ते पर है। पहले, जब ब्रिक्स की बैठक हुई थी, तो आपने वादा किया था कि आप रुपये को मज़बूत करेंगे।

यह एक ऐसी करेंसी बनेगी जो पूरी दुनिया में चलेगी। इसके बजाय, डॉलर की कीमत बढ़ गई है। रुपया बहुत नीचे गिर गया है। और हमेशा की तरह, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री को यह समझ नहीं आ रहा है कि भारत की विदेश नीति के साथ क्या किया जाए।”

उन्होंने चीन के प्रति केंद्र सरकार के रवैये पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि बीजिंग उन इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है जिन पर भारत अपना दावा करता है।

उन्होंने कहा, “अगर आपको याद हो, तो भारत के प्रधानमंत्री और चीन के प्रीमियर गुजरात में झूले पर बैठे थे, महाबलीपुरम में बातचीत की थी, और उसके बाद क्या हुआ? उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पर कब्ज़ा कर लिया। वे भारत के दूसरे हिस्सों पर भी कब्ज़ा कर रहे हैं।

वे हमारी सीमाओं के अंदर गाँव बसा रहे हैं। और प्रधानमंत्री में इतनी हिम्मत भी नहीं है कि वे खुलकर कह सकें कि चीनी सरकार जो कर रही है, वह गलत है। आपने पेट्रोलिंग की अहम जगहें खो दी हैं। आपने भारतीय सेना के लिए ज़रूरी इलाके खो दिए हैं। और आपमें उनका सामना करने की हिम्मत भी नहीं है।”

कर्नाटक के मंत्री ने आरोप लगाया, “यह 56 इंच का सीना सिर्फ़ कांग्रेस को दिखाने के लिए है या देश के दुश्मनों को भी दिखाने के लिए है? और जब विदेश मंत्री जैसा कोई व्यक्ति यह कहे कि ‘क्या मैं बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश से झगड़ा मोल लूँगा?’, तो आप देश की विदेश नीति को समझ सकते हैं।”

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Vande Mataram पर Priyank Kharge ने BJP को घेरा

Priyank Kharge ने वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर भी बीजेपी की आलोचना की और सवाल उठाया कि राष्ट्रीय गीत को कैसे गाया जाना चाहिए, यह तय करने का अधिकार पार्टी को किसने दिया है।

Priyank Kharge ने कहा, “क्या BJP को लगता है कि वे सरदार वल्लभभाई पटेल से बड़े हैं? क्या वे नेहरू, गांधी या सुभाष चंद्र बोस से बड़े हैं? इन्हीं लोगों ने तय किया था कि क्या गाया जाना चाहिए।

क्या BJP इन लोगों से ऊपर है?” खरगे ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में BJP के योगदान पर सवाल उठाए और RSS तथा विनायक दामोदर सावरकर पर आरोप लगाए।

Priyank Kharge ने पूछा, “आज़ादी की लड़ाई में उनका क्या योगदान है? जब नेताजी बोस अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ सेना तैयार कर रहे थे, तब RSS और सावरकर क्या कर रहे थे?” इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स (BRICS) बिज़नेस फ़ोरम को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स के भीतर ज़्यादा आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

जयशंकर ने सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंध मज़बूत करने, कमर्शियल रिश्तों में विविधता लाने और मज़बूत सप्लाई चेन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होना है।

इसमें नेताओं के भारत की अध्यक्षता में शुरू की गई पहलों और ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा करने की उम्मीद है। मुख्य विषयों में व्यापार, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मज़बूत सप्लाई चेन और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार शामिल हो सकते हैं।

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