E20 नीति पर Arvind Kejriwal का केंद्र पर हमला, महंगाई को लेकर साधा निशाना
केजरीवाल ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए लंबे समय के रोडमैप की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार बिना लोगों से ठीक से सलाह-मशविरा किए ब्लेंडिंग का प्रतिशत बढ़ाना चाहती है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने सोमवार को केंद्र सरकार की E20 फ्यूल पॉलिसी पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल किए जाने से चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं और गाड़ी मालिकों को परेशानी हो रही है।
लोगों तक अपनी बात पहुँचाने के लिए एक पहल की घोषणा करते हुए, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के तकनीकी और आर्थिक असर पर चर्चा करने के लिए एक ‘टाउन हॉल’ कार्यक्रम आयोजित करेगी। केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “25 लाख टन गन्ना इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया गया है। देश में चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं।
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Arvind Kejriwal बोले- महंगी चीनी और E20 ईंधन से जनता परेशान, कल टाउन हॉल करेंगे
आज चीनी महंगी हो गई है, लोग खराब ईंधन से परेशान हैं और विदेशी मुद्रा की भी कोई बचत नहीं हो रही है। हम कल दोपहर 3 बजे इन मुद्दों पर एक टाउन हॉल कार्यक्रम करेंगे। हम आज एक WhatsApp नंबर जारी कर रहे हैं ताकि लोग E20 ईंधन के मुद्दे पर हमसे संपर्क कर सकें।”
इंडस्ट्री की चिंताओं के बावजूद सरकार के इस बदलाव पर ज़ोर देने पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने पूछा, “जब भारत ने मना कर दिया, तो भी PM मोदी E20 के लिए क्यों ज़ोर दे रहे हैं?
SIAM (सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स) ने गाड़ियों पर E20 के असर को लेकर चिंता जताई थी और पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के लिए दूसरे विकल्प खोजने के लिए एक रिपोर्ट सौंपी थी।
एक हफ़्ते के अंदर ही SIAM को वह रिपोर्ट वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।”
उन्होंने आगे कहा कि कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियाँ नए फ़्यूल स्टैंडर्ड्स को लेकर हिचकिचा रही हैं। उन्होंने कहा, “खबरों के मुताबिक, तीन ऑटोमोबाइल कंपनियों ने गाड़ियों के नियमों के पालन (कम्प्लायंस) से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए E20 को अपनाने से इनकार कर दिया।
Arvind Kejriwal का सवाल- ब्राजील को E20 अपनाने में दशक लगे, भारत को 3 साल में क्यों धकेला?
ब्राज़ील को E20 अपनाने में कई दशक लग गए। भारत को तकनीकी और ग्राहकों से जुड़ी अनसुलझी चिंताओं के बावजूद सिर्फ़ तीन साल में ही इसकी तरफ़ धकेल दिया गया है। अगर E20 के पीछे विज्ञान और सबूत हैं, तो सही सवाल उठाने वालों की आवाज़ क्यों दबाई जा रही है?”
Arvind Kejriwal ने इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए लंबे समय के रोडमैप की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार बिना लोगों से ठीक से सलाह-मशविरा किए ब्लेंडिंग का प्रतिशत बढ़ाना चाहती है।
AAP संयोजक ने कहा, “E25, E30, E40, E85 – यह सरकार लोगों को यह बताए बिना कि यह सब किस दिशा में जा रहा है, इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाती रहेगी। उन्हें और टेस्टिंग की ज़रूरत नहीं है। उन्हें विज्ञान, विशेषज्ञों और लोगों की बात सुनने की ज़रूरत है।”
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