Congress के Rakesh Sinha ने SIR विवाद को लेकर CEC के ख़िलाफ़ SIT जांच का समर्थन किया।
सिन्हा ने कहा, "यह मुद्दा—वोट की चोरी का यह मामला—कोई मामूली या छोटी बात नहीं है। यह एक गंभीर मुद्दा है। यह सिर्फ़ वोटों की चोरी का मामला नहीं है; आपने असल में लोकतंत्र की ही चोरी की है। एक वोट संविधान को मज़बूत करता है।

कांग्रेस नेता Rakesh Sinha ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग वाली एक याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह मामला सिर्फ़ “वोट की चोरी” तक सीमित नहीं है, बल्कि “लोकतंत्र की चोरी” से जुड़ा है।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) विवाद के बीच CEC के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से जांच की मांग वाली याचिका पर सिन्हा ने आरोप लगाया कि करोड़ों वोटर्स को उनके वोटिंग के अधिकार से वंचित कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की अपील की।
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Rakesh Sinha ने वोट हटाने पर उठाए सवाल
Rakesh Sinha ने कहा, “यह मुद्दा—वोट की चोरी का यह मामला—कोई मामूली या छोटी बात नहीं है। यह एक गंभीर मुद्दा है। यह सिर्फ़ वोटों की चोरी का मामला नहीं है; आपने असल में लोकतंत्र की ही चोरी की है। एक वोट संविधान को मज़बूत करता है।
फिर भी, आपने करोड़ों वोट हटा दिए।””आपने उन लोगों को वोट देने के उनके अधिकार से वंचित कर दिया। दूसरे शब्दों में, आपने एक तरह से संविधान को कमज़ोर किया है।
इसलिए, न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया गया और हमें उम्मीद है कि अदालत पूरी निष्पक्षता के साथ न्याय करेगी और SIT के गठन का आदेश देगी,” उन्होंने आगे कहा।
यह टिप्पणी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद आई है, जिसमें भारत के चुनाव आयोग (ECI) में कथित तौर पर एकतरफ़ा फ़ैसले लेने के लिए CEC ज्ञानेश कुमार पर मुक़दमा चलाने की मांग की गई है।
इन फ़ैसलों में फ़ॉर्म 6 में बदलाव, “ECINet के ज़रिए वोटर-लिस्ट डेटा का केंद्रीकरण” और ऐसे काम शामिल हैं जिनसे कथित तौर पर योग्य वोटर लिस्ट से बाहर हो गए। याचिका में सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, DG-IT सीमा खन्ना और अन्य अधिकारियों का भी नाम है, जिन पर आधिकारिक ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने 23 सितंबर को छपी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का ज़िक्र किया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच वोटर लिस्ट और डेटाबेस एक्सेस से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया कि ECINet पोर्टल पर ‘फॉर्म 6’ में बदलाव करके पहली बार वोट देने वालों के लिए “पिछली SIR” जानकारी देना ज़रूरी कर दिया गया था, और दावा किया गया कि यह कदम ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में औपचारिक संशोधन किए बिना उठाया गया था।
इसमें वोटर लिस्ट सिस्टम तक डिसेंट्रलाइज़्ड (विकेंद्रीकृत) एक्सेस को बहाल करने और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच या SIT जांच की भी मांग की गई।
‘पद्म भूषण’ टिप्पणी पर Rakesh Sinha का जवाब
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य की टिप्पणियों का जवाब देते हुए – जिन्होंने विपक्ष की आलोचना के बीच CEC का समर्थन करते हुए कहा था कि ज्ञान कुमार को पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने और वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए “कम से कम पद्म भूषण” मिलना चाहिए – सिन्हा ने कहा, “देखिए, भारतीय जनता पार्टी में MLA या मंत्री बनने के लिए… यह डिग्री है।
आप कितने पढ़े-लिखे हैं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता; फ़र्क इस बात से पड़ता है कि आप अंत में क्या कहते हैं।”Rakesh Sinha ने आगे कहा, “अगर कुमार ज्ञानेश ने वोट नहीं चुराए होते, तो सुवेंदु अधिकारी बंगाल के मुख्यमंत्री नहीं बनते।”
चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री और NDA सहयोगी चिराग पासवान के इस बयान पर कि चुनाव आयोग को अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए, सिन्हा ने कहा कि CEC को प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
Rakesh Sinha ने कहा, “देखिए, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। और जब 1.4 अरब भारतीय संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठा रहे हैं, तो यह चुनाव आयोग की भी ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार ज्ञानेश गुप्ता को अपने दो आयुक्तों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए—अगर उनमें हिम्मत है, अगर उन्होंने कुछ नहीं चुराया है। उन्हें अपनी बात रखने दें।”सिन्हा ने कहा कि NDA के सहयोगियों को भी आगे आना चाहिए और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि NDA के जो लोग इस बारे में बात कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ़ बात नहीं करनी चाहिए—उन्हें सड़कों पर भी उतरना चाहिए। भारत के लोकतंत्र को बचाने की ज़िम्मेदारी उनकी भी है।” ‘
द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विवाद और बढ़ गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) से जुड़े फ़ैसलों और प्रक्रियाओं पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं।
Jairam Ramesh बोले- फॉर्म 6 में बदलाव ‘अवैध और असंवैधानिक’
EC के खिलाफ विपक्षी दलों का मोर्चा
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (UBT) और वामपंथी दलों समेत विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर हमले तेज़ कर दिए हैं। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है और जवाबदेही की मांग की है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई राज्यों में चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया को संभालने के तरीके के खिलाफ प्रदर्शन किए।
असम में, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुवाहाटी के राजीव भवन से एक विरोध रैली निकाली। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों व लिए गए फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की गई।
पार्टी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान APCC अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई समेत कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए “बेरहम कार्रवाई” करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि देश भर में कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, युवा नागरिकों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें चुनावी हार से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
इस बीच, चुनाव आयोग का कहना है कि इंटरनल टेक्निकल नोट्स, लिखित सवाल और सुझाव कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं।
ECI ने ज़ोर देकर कहा है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें तीनों आयुक्तों की मंज़ूरी मिली थी। उम्मीद है कि यह मुद्दा 29 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में उठेगा।
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