P. Chidambaram ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए और फ़ॉर्म 6 को लेकर ECI को घेरा।

चिदंबरम ने कहा, "अगर 'छूटे हुए' वोटर सिर्फ़ 'फॉर्म 6' भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं, तो पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह बात क्यों नहीं बताई गई?"

सीनियर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री P. Chidambaram ने शनिवार को वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान वोटरों के नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि लिस्ट से छूटे हुए वोटरों के नाम दोबारा जोड़ने में होने वाले खर्च के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा।

X पर एक पोस्ट में P. Chidambaram ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को यह क्यों नहीं बताया कि वोटर लिस्ट से छूटे हुए वोटर सिर्फ़ ‘फॉर्म 6’ भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

P. Chidambaram ने Form 6 पर ECI से सवाल पूछे

P. Chidambaram ने कहा, “अगर ‘छूटे हुए’ वोटर सिर्फ़ ‘फॉर्म 6’ भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं, तो पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह बात क्यों नहीं बताई गई?”

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सही प्रक्रिया का पालन किए बिना लाखों वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे और बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इन नामों को हटाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया था।

उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में सही प्रक्रिया का पालन किए बिना लाखों वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपील सुनने के लिए ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया। लाखों अपीलें दायर की गईं। जजों ने छह महीने तक कड़ी मेहनत की।”

P. Chidambaram ने आगे दावा किया कि ट्रिब्यूनल लगभग 1.26 लाख अपीलों का निपटारा करने में सफल रहे और 91-93 प्रतिशत अपीलें मंजूर कर ली गईं, जिसके परिणामस्वरूप वोटर लिस्ट में नाम फिर से शामिल किए गए।

कांग्रेस नेता ने कहा, “क्या यह सब बेकार था? अगर सिर्फ़ फ़ॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम जुड़वाया जा सकता है, तो ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल में की गई यह कवायद समय और पैसे की पूरी तरह बर्बादी थी।”

उन्होंने SIR प्रक्रिया के वित्तीय पहलुओं पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से 13.30 करोड़ नाम हटाने में पहले ही करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। P. Chidambaram ने पूछा, “13.30 करोड़ नाम हटाने में करोड़ों रुपये खर्च हुए। अब ‘छूट गए’ वोटरों को फिर से लिस्ट में शामिल करने पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे।

इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?” इससे पहले शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर अपना हमला तेज़ कर दिया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की।

Imran Masood ने UP में Congress को मज़बूत करने का संकल्प लिया।

Rahul Gandhi ने ‘वोट की चोरी’ का लगाया आरोप

गांधी जयंती पर X पर एक पोस्ट में गांधी ने कहा कि हज़ारों युवा उस चीज़ के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे हैं जिसे उन्होंने “वोट की चोरी” बताया और आरोप लगाया कि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

गांधी ने विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए अहिंसा और सच्चाई पर महात्मा गांधी की सीख का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “बापू ने हमें यही सिखाया था – सच बोलो, शांति से लड़ो।

और यही बात इस सरकार को सबसे ज़्यादा डराती है।” उन्होंने आगे कहा, “क्योंकि लाठी भीड़ को तो रोक सकती है, लेकिन सवाल को नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे। और वह सिस्टम भी जाएगा जिसने उन्हें वहां बिठाया था।”

इस मुद्दे को लेकर दिल्ली और मुंबई में विपक्षी पार्टियों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान 500 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में प्रदर्शन हुए, जिसमें वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता की मांग की गई।

दिल्ली में कई विपक्षी नेताओं, जिनमें AAP विधायक सौरभ भारद्वाज भी शामिल थे, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत लगी पाबंदियों के बीच हिरासत में लिया गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ विपक्ष का अभियान जारी रहने की उम्मीद है; INDIA गठबंधन आगे और विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहा है, जिसमें 6 अक्टूबर को एक कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली शामिल है।

SIR पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा

यह नया राजनीतिक विवाद ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फ़ैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं।

बताई गई आपत्तियों में फ़ॉर्म 6, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और वोटर लिस्ट के डेटाबेस तक पहुँच से जुड़े मुद्दे शामिल थे। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि बताई गई आपत्तियाँ अंतिम फ़ैसलों पर संस्थागत असहमति थीं।

चुनाव आयोग ने कहा कि ड्राफ़्ट स्टेज के दौरान उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी सामान्य प्रशासनिक और फ़ैसला लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। ECI ने बताया कि SIR प्रक्रिया के शेड्यूल से जुड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

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