Naresh Bansal ने विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव किया
किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले, तीनों सदस्यों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन फैसला हमेशा सर्वसम्मत होता है..." उन्होंने आगे कहा, "विपक्ष का रवैया सच्चाई को न मानने वाला और अड़ियल है।

शनिवार को सांसद Naresh Bansal ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ECI के अंदर कोई “कन्फ्यूजन” नहीं है और विपक्ष सिर्फ़ यह दिखाने के लिए हंगामा कर रहा है कि आयोग में कन्फ्यूजन है।
बीजेपी सांसद ने शनिवार को “ECI के अंदर निश्चित रूप से कोई कन्फ्यूजन नहीं है। विपक्ष सिर्फ़ यह दिखाने के लिए हंगामा कर रहा है कि आयोग में कन्फ्यूजन है। फैसले बातचीत के ज़रिए लिए जाते हैं।
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Naresh Bansal का दावा- आयोग में कोई मतभेद नहीं
किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले, तीनों सदस्यों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन फैसला हमेशा सर्वसम्मत होता है…” उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष का रवैया सच्चाई को न मानने वाला और अड़ियल है।
अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आता है, तो उसे अच्छा माना जाता है; अगर EVM से नतीजे उनके पक्ष में आते हैं, तो उन्हें अच्छा माना जाता है—वरना, वे खराब होते हैं… जो लोग सेना के खिलाफ टिप्पणी करने से भी नहीं हिचकिचाते, उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है?…”
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा, “मैं इस बात को किसी भी तरह से सही नहीं मानता कि चुनाव आयोग की आलोचना हो रही है या उसे किसी तरह का झटका लगा है।
भले ही विपक्ष चुनाव आयोग पर आरोप लगाता हो, लेकिन आयोग के कामों और ज़िम्मेदारियों के निर्वहन को देश की जनता, अन्य संवैधानिक संस्थाओं और अदालतों ने सही ठहराया है…”
Priyanka Gandhi ने EC के लिए कानूनी सुरक्षा हटाने की मांग की।
SIR फैसलों पर 14 बार आपत्ति का दावा
यह बयान वोटर लिस्ट की SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने शनिवार को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) के कार्यक्रम से जुड़े सभी फ़ैसले “आयोग की सर्वसम्मत मंज़ूरी” से लिए गए थे।
चुनाव आयोग ने आगे कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र डेप्युटेशन पर काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था, न कि चुनाव आयोग के किसी नीतिगत मामले से।
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