CJP के जेन Z आंदोलन पर Dilip Ghosh का बड़ा आरोप

पत्रकारों से बात करते हुए Dilip Ghosh ने कहा, "CJP का 'जेन Z' आंदोलन एक बड़ा घोटाला है। लोग किसी एक मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा करते हैं और एक नाम का इस्तेमाल करते हैं। उनके काम से उनके मकसद साफ हो रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के मंत्री Dilip Ghosh ने गुरुवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े ‘जेन Z’ (Gen Z) आंदोलन को एक “बड़ा घोटाला” करार दिया। उन्होंने कहा कि जो कोई भी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा, चाहे वह किसी भी नाम से काम कर रहा हो।

CJP कार्यकर्ताओं – सौरव दास और आशुतोष रंका – के ‘जेन Z’ का हिस्सा होने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों पर छिड़ी हालिया बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए, Dilip Ghosh ने कहा कि इस आंदोलन के उद्देश्य इसके प्रतिभागियों के कामों से साफ हो रहे हैं।

Dilip Ghosh ने CJP पर लगाए आरोप

पत्रकारों से बात करते हुए Dilip Ghosh ने कहा, “CJP का ‘जेन Z’ आंदोलन एक बड़ा घोटाला है। लोग किसी एक मुद्दे को लेकर हंगामा खड़ा करते हैं और एक नाम का इस्तेमाल करते हैं। उनके काम से उनके मकसद साफ हो रहे हैं।

हम सभी जानते हैं कि उनके पीछे कौन है और वे क्या चाहते हैं। देश और दुनिया भी यह समझ चुकी है। इसलिए, उन्होंने चाहे जो भी किया हो या किसी भी नाम का इस्तेमाल किया हो, अगर उनके काम गैर-कानूनी हैं, तो उन्हें जवाबदेह ठहराया ही जाएगा।”

Dilip Ghosh ने आगे कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है, जबकि मामले के कानूनी पहलुओं पर फैसला अदालत करेगी। उन्होंने कहा, “अदालत जो भी कहेगी, वही होगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार और पुलिस की है।

उनके पास जो भी जरूरी हो, वह करने का अधिकार है। लेकिन कानून सबके लिए बराबर है, और बाकी काम अदालत देखेगी।” दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दास, रंका और अन्य लोगों की एक याचिका पर सुनवाई की।

इस याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई थी। सुनवाई के दौरान, जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने उनकी उम्र के बारे में पूछा।

उनके वकील अभिक चिमनी ने बताया कि दास 27 साल के हैं और रंका 32 साल के हैं, जिस पर अदालत ने टिप्पणी की कि वे ‘जनरेशन Z’ (Gen Z) का हिस्सा नहीं हैं। जब अदालत को बताया गया कि 1997 के बाद पैदा हुए लोगों को ‘जनरेशन Z’ माना जाता है, तो अदालत ने फिर कहा, “तो फिर आप ‘जनरेशन Z’ नहीं हैं।”

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।
बीच, मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत ने दास और रंका को 21 अक्टूबर को रिहा करने का आदेश दिया।

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50 हजार के बॉन्ड पर मिली राहत

इसके लिए उन्हें 50,000 रुपये के पर्सनल और श्योरिटी बॉन्ड भरने पड़े, साथ ही शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने का लिखित वचन भी देना पड़ा। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि जब तक कानून के अनुसार जंतर-मंतर को ‘डीनोटिफाई’ (denotify) नहीं किया जाता, तब तक वे वहां विरोध प्रदर्शन का आह्वान न करें।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के इस आरोप पर कि बीजेपी अवैध तरीकों और वोट चोरी के जरिए चुनाव जीतती है, घोष ने कहा कि विपक्ष ऐसे दावे इसलिए कर रहा है क्योंकि वह सत्ता से बाहर है।

उन्होंने कहा, “जब वे जीतते हैं, तो सब कुछ कानूनी होता है, और बाकी सब कुछ गैर-कानूनी। बीजेपी कई सालों से जीत रही है और अच्छा शासन दे रही है, जिससे जनता खुश है। वे सत्ता से बाहर हैं, इसलिए उनका परेशान होना स्वाभाविक है, और यही वजह है कि वे ऐसी बातें कहते रहते हैं।”

इसके अलावा, कोलकाता के चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ – जिसमें 19 लोगों की जान चली गई थी – की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर प्रतिक्रिया देते हुए, घोष ने कहा कि एक गहन जांच जरूरी है और जो भी दोषी पाया जाए, उसे सजा मिलनी चाहिए।

SIT को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दी गई तीन महीने की समय-सीमा और इस घटना के संबंध में सामने आ रहे बीजेपी नेताओं – जिनमें तमोग्न घोष और बिजोय ओझा शामिल हैं – के नामों के बारे में पूछे जाने पर, घोष ने कहा, “चाहे कोई नेता हो, वीआईपी हो या कोई सेलिब्रिटी, वे भी इन पूजा आयोजनों से जुड़े हो सकते हैं।

मुझे खुद भी कुछ पूजा आयोजनों के लिए सलाहकार बनाया गया है। इसलिए, अगर वे कोई पूजा आयोजित करते हैं, व्यवस्था संभालते हैं, और इंतजाम में कुछ गड़बड़ हो जाती है, तो मुझे नहीं पता कि उनके नाम उस सूची में हैं या नहीं।

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घटना की निष्पक्ष जांच की मांग

जो कुछ भी हुआ, वह बहुत दुखद है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। अगर इसके पीछे कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए और कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। एक बार जांच शुरू हो जाए, तो सब कुछ सामने आ जाएगा।”

पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से इस भगदड़ की जांच के लिए SIT का गठन किया है। इस घटना में कई लोग घायल भी हुए थे। सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता वाले इस पैनल को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

इस जांच का उद्देश्य उन परिस्थितियों का पता लगाना है जिनकी वजह से यह घटना हुई, और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए उपाय सुझाना है। जवाबदेही तय करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने भी जांच शुरू कर दी है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने हर पीड़ित के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा और एक नौकरी देने की घोषणा की है। दक्षिण 24 परगना में त्योहारों के दौरान और दिवाली से पहले पकड़े गए विस्फोटकों पर टिप्पणी करते हुए, Dilip Ghosh ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और स्थिति पर कड़ी नज़र रख रही है।

उन्होंने कहा, “इस समय पूरे पश्चिम बंगाल में त्योहार चल रहे हैं और दिवाली भी आने वाली है। ऐसे में, कोई व्यक्ति बम या डेटोनेटर का इस्तेमाल करके कोई अप्रिय घटना कर सकता है। पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से देख रही है।”

Dilip Ghosh ने आगे आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राज्य में विस्फोटकों और बारूदी सुरंगों (लैंडमाइन) के निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया था। उन्होंने कहा, “पहले भी पश्चिम बंगाल में विस्फोटक और बारूदी सुरंगें बनाई जाती थीं, लेकिन पिछली सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। मौजूदा प्रशासन इस पर कड़ी नज़र रख रहा है।”

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