SIR विवाद में Dilip Ghosh ने चुनाव आयोग का बचाव किया

चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जाँच-पड़ताल कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रियाएँ हैं।

पश्चिम बंगाल के मंत्री Dilip Ghosh ने गुरुवार को वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसमें कुछ गलत हुआ है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने इस प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर आपत्ति जताई थी। यहां पत्रकारों से बात करते हुए Dilip Ghosh ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी।

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान वोटर लिस्ट की प्रक्रियाओं से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

SIR पर Dilip Ghosh ने दी सफाई

इन आपत्तियों में ‘फॉर्म 6’ में बदलाव, वोटरों के नाम हटाना और वोटर लिस्ट के डेटा को संभालने के तरीके जैसे मुद्दे शामिल थे। Dilip Ghosh ने कहा, “SIR पर कोर्ट में भी चर्चा हुई थी और लोग न्यायपालिका के पास भी गए थे, लेकिन किसी भी दावे में कोई दम नहीं था।

ऐसा कुछ गलत हुआ, यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है। ऐसा नहीं है कि किसी ऐसे व्यक्ति का नाम गैर-कानूनी तरीके से शामिल किया गया जो नागरिक नहीं है; अगर ऐसा हुआ होता, तो संबंधित दस्तावेज़ पेश करने पर नाम शामिल कर लिया जाता।”

Dilip Ghosh ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आगे कहा, “आखिरकार, विपक्ष के पास करने के लिए कोई ठोस काम नहीं है। वे यहाँ उपचुनावों के लिए उम्मीदवार भी नहीं उतार सकते।

उनकी बात कौन सुनेगा?” इस बीच, चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सदस्यों द्वारा उठाए गए सवाल और टिप्पणियाँ उसके सामान्य आंतरिक कामकाज का हिस्सा थे।

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SIR पर चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने कहा कि लिखित नोट, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जाँच-पड़ताल कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रियाएँ हैं।

ECI ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसलों सहित उसके सभी आधिकारिक फैसलों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त थी और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

हालाँकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची प्रबंधन के कई पहलुओं पर चिंताएँ जताई थीं, जिनमें फॉर्म 6 में बदलाव और वोटर डेटाबेस तक पहुँच का केंद्रीकरण शामिल है।

इस रिपोर्ट पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं; कई नेताओं ने चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया की बेहतर जाँच-पड़ताल की माँग की है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। वहीं, बीजेपी ने चुनाव आयोग का बचाव किया है और आंतरिक विचार-विमर्श को लोकतांत्रिक कामकाज का हिस्सा बताया है।

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