Delhi High Court की टिप्पणी के बाद BJP नेता Prakash Reddy का CJP पर हमला
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। इस बीच, मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 21 अक्टूबर को दास और रंका को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया।

बीजेपी नेता Prakash Reddy ने गुरुवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वे खुद को ‘जेन जेड’ (Gen Z) के रूप में गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।
उन्होंने उनके राजनीतिक नेता होने के दावों पर भी सवाल उठाए। Prakash Reddy , दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उनकी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में अपनी न्यायिक हिरासत के खिलाफ CJP नेताओं की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही के बारे में बात करते हुए, रेड्डी ने कहा कि इन दोनों ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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Prakash Reddy ने CJP पर उठाए सवाल
Prakash Reddy ने बताया, “आशुतोष रंका और सौरव दास दावा करते हैं कि वे इस देश के राजनीतिक नेता हैं, लेकिन असल में वे ऐसा नहीं हैं। उनकी पार्टी केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित है, यह कोई रजिस्टर्ड राजनीतिक मंच नहीं है।”
Prakash Reddy ने सुनवाई के दौरान दास और रंका की उम्र को लेकर अदालत की मौखिक टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पाया कि आशुतोष रंका और सौरव दास ‘जेन Z’ (Gen Z) नहीं हैं, भले ही वे खुद को ‘जेन Z’ बताते हों।”
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि ये दोनों राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और कुछ खास राजनीतिक विचारधाराओं से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, “ये लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और देश की कुछ राष्ट्र-विरोधी राजनीतिक प्रणालियों से प्रभावित हैं।
इस देश की जनता समझ जाएगी कि आशुतोष रंका और सौरव दास कौन हैं, और लोग उनके साथ उसी के अनुसार व्यवहार करेंगे।” दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दास, रंका और अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की।
इस याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई थी। सुनवाई के दौरान, जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने याचिकाकर्ताओं की उम्र के बारे में पूछा।
उनके वकील, अभिक चिमनी ने अदालत को बताया कि दास 27 साल के हैं और रंका 32 साल के हैं। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि वे ‘जेन Z’ का हिस्सा नहीं हैं। यह बताए जाने पर कि 1997 के बाद पैदा हुए लोगों को ‘जेन Z’ माना जाता है, अदालत ने फिर कहा, “तो फिर आप ‘जेन Z’ नहीं हैं।”
Sanjay Raut ने CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत के खिलाफ Supreme Court का रुख किया
Das और Ranka हुए रिहा
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। इस बीच, मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 21 अक्टूबर को दास और रंका को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया।
उन्होंने 50,000 रुपये के निजी बॉन्ड और ज़मानत बॉन्ड भरे, साथ ही शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने का लिखित वचन भी दिया।
अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि जब तक कानून के अनुसार जंतर-मंतर को ‘डीनोटिफाई’ (अधिसूचना से बाहर) नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान न करें।
अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में कोई भी विरोध प्रदर्शन संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। इस मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
इससे पहले, CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख, रत्ना सिंह ने दोनों कार्यकर्ताओं की रिहाई का स्वागत किया और कहा कि उनका संगठन युवाओं के साथ जुड़ा हुआ है। हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा, “सौरव दास 27 साल के हैं।
वे पूरी तरह से ‘जेन जेड’ (Gen Z) पीढ़ी से आते हैं। आशुतोष भी लगभग ‘जेन जेड’ पीढ़ी के ही हैं, और हम युवाओं के मुद्दों से खुद को जुड़ा हुआ पाते हैं। आखिरकार, हम भी इस देश के युवा ही हैं, इसलिए जाहिर है कि हम युवा हैं।”
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