Jairam Ramesh ने खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
रमेश ने कहा, "लेकिन प्रधानमंत्री महंगाई पर चुप हैं। देश पूछ रहा है, 'प्रधानमंत्री जी, वे 'अच्छे दिन' कहाँ गए? क्या वे सिर्फ़ भाषणों तक ही सीमित रह गए हैं?' लोग भूखे मर रहे हैं और सरकार चुप है... क्या यही नया भारत है?

कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज और सांसद Jairam Ramesh ने सोमवार को आरोप लगाया कि खाने-पीने की चीज़ों और ज़रूरी सामान की बढ़ती कीमतों ने गरीब और मध्यम-वर्गीय परिवारों का जीवन मुश्किल बना दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से राहत देने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की।
X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि पिछले एक महीने में मसालों की कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने छोटी इलायची की कीमत 4,000 रुपये से बढ़कर 4,400 रुपये प्रति किलो, बड़ी इलायची की कीमत 2,400 रुपये से बढ़कर 2,800 रुपये प्रति किलो और जीरे की कीमत 360 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो होने का ज़िक्र किया।
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Jairam Ramesh बोले- मसालों के दाम में 25% तक का उछाल
उन्होंने कहा, “पिछले एक महीने में मसालों की कीमतों में 10% से 25% तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। छोटी इलायची 4,000 रुपये से बढ़कर 4,400 रुपये प्रति किलो, बड़ी इलायची 2,400 रुपये से बढ़कर 2,800 रुपये प्रति किलो और जीरा 360 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो हो गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जावित्री (mace) की कीमतें ₹2,500 से बढ़कर ₹3,000 प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जबकि अरहर (tur) दाल ₹100 से ₹130 प्रति किलोग्राम, चना दाल ₹70 से ₹100 प्रति किलोग्राम और उड़द दाल ₹120 से ₹140 प्रति किलोग्राम हो गई है। रमेश के अनुसार, सरसों का तेल ₹190 से ₹210 प्रति लीटर और सफोला तेल ₹240 से ₹280 प्रति लीटर हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि पूरे भारत में प्याज की औसत खुदरा कीमत जून में ₹29.50 प्रति किलोग्राम से बढ़कर सितंबर में ₹53.78 प्रति किलोग्राम हो गई, जिसे उन्होंने साढ़े तीन महीनों में 82.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताया।
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Jairam Ramesh बोले- महंगाई पर प्रधानमंत्री चुप
उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई के कारण गरीब परिवारों के लिए दालें और खाने-पीने की ज़रूरी चीज़ें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने महंगाई पर सरकार के रवैये को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल भी किया और पूछा कि वे “अच्छे दिन” कहाँ गए जिनका वादा किया गया था।
रमेश ने कहा, “लेकिन प्रधानमंत्री महंगाई पर चुप हैं। देश पूछ रहा है, ‘प्रधानमंत्री जी, वे ‘अच्छे दिन’ कहाँ गए? क्या वे सिर्फ़ भाषणों तक ही सीमित रह गए हैं?’ लोग भूखे मर रहे हैं और सरकार चुप है… क्या यही नया भारत है? आपके वादे का क्या हुआ? उस संकल्प और प्रतिज्ञा का क्या हुआ?” उन्होंने मांग की कि सरकार जिसे उन्होंने “बेकाबू महंगाई” कहा, उसे नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाए और आम लोगों को राहत दे।
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